
उत्तराखंड सचिवालय में सेवारत डॉ अशोक कुमार मिश्र ‘क्षितिज’ एक ऐसे अधिकारी हैं, जिनकी पहचान प्रशासनिक दायित्वों से कहीं आगे समाजसेवा, साहित्य और संगीत तक फैली है। उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर लोक भवन, देहरादून में जब उन्होंने अपना रचित गीत “देवभूमि उत्तराखंड मेरी जान है” मधुर स्वर में प्रस्तुत किया, तो राज्यपाल, मंत्रीगण और सभागार में उपस्थित सभी श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। राज्यपाल ने उनके गीत और आवाज की सराहना करते हुए शुभकामनाएं दीं।
डॉ मिश्र शासकीय कार्यों के साथ-साथ निर्धन बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और पर्यावरण, गंगा स्वच्छता व नारी सशक्तिकरण जैसे अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। शिक्षा में नवाचार को बढ़ावा देने हेतु उन्होंने ‘अभ्युदय वात्सलयम’ नामक संस्था की स्थापना की, जो वंचित वर्ग के कल्याण और सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता सुधार के लिए कार्यरत है।
एक कवि और साहित्यकार के रूप में उनके पाँच कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं, जबकि गायन में भी उनकी विशेष पहचान है। प्रशासन, साहित्य और समाजसेवा का यह समन्वय डॉ अशोक कुमार मिश्र ‘क्षितिज’ को वास्तव में समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनाता है।
Reported By: Rajesh Kumar













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