
हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एचआईएमएस) जौलीग्रांट में क्लिनिकल रिसर्च और चिकित्सा नैतिकता की बारीकियों पर एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य सेवा में अखंडता सुनिश्चित करना गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस और मेडिकल एथिक्स विषय पर प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया।
एचआईएमएस जौलीग्रांट के क्लिनिकल रिसर्च विभाग की ओर से आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरूआत गुरू वंदना के साथ हुई। इस दौरान मुख्य अतिथि प्रिंसिपल एचआईएमएस डॉ. रेनू धस्माना ने कहा कि एक चिकित्सक और मरीज का रिश्ता केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अटूट विश्वास और सहानुभूति पर टिका होता है।
उन्होंने दोहराया कि संस्थान उच्च स्तरीय नैतिक स्वास्थ्य प्रथाओं को लागू करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। डॉ. किरण भट्ट ने शोध की विश्वसनीयता पर जोर देते हुए कहा कि मरीजों की सुरक्षा और रिसर्च की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस के नियमों का पालन करना हर हाल में अनिवार्य है। डॉ. डी. सी. धस्माना ने उपस्थित पेशेवरों को प्रेरित करते हुए कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नियामक दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करना पेशेवर जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम की प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. निक्कू यादव ने बताया कि पांच सप्ताह तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को क्लिनिकल रिसर्च के व्यावहारिक पहलुओं से रूबरू कराया जायेगा| उन्होने बताया कि प्रशिक्षण में 30 स्वास्थ्य अनुसंधान पेशेवर सहित 10 फैकल्टी सदस्य भाग ले रहे है।
Reported By: Arun Sharma













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