एम्स ऋषिकेश में क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के आधुनिक प्रबंधन को लेकर चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। संस्थान के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग, कॉलेज ऑफ नर्सिंग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न जनपदों से आए चिकित्सा अधिकारियों और स्टाफ नर्सों ने प्रतिभाग किया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को सीओपीडी की शीघ्र पहचान, रोकथाम, आधुनिक उपचार, पुनर्वास और आपातकालीन प्रबंधन से संबंधित नवीनतम जानकारी और व्यावहारिक कौशल प्रदान करना था।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने सीओपीडी और इसके जोखिम कारकों की समय रहते पहचान तथा उनके नियंत्रण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक अवस्था में बीमारी का निदान, रोग की प्रगति को रोकने के लिए प्रभावी कदम और प्राथमिक व द्वितीयक स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर पर उचित हस्तक्षेप से मरीजों के उपचार परिणामों में महत्वपूर्ण सुधार किया जा सकता है।
डीन एकेडमिक प्रो. सौरभ वार्ष्णेय ने सीओपीडी के उपचार में व्यक्तिगत और मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मरीज में बीमारी की गंभीरता, जोखिम कारक, सह-रुग्णताएं और उपचार की जरूरत अलग-अलग हो सकती हैं। ऐसे में मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार रणनीति अपनाना जरूरी है।
चिकित्सा अधीक्षक प्रो. सत्या श्री बालीजा ने स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता को व्यावहारिक और हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण के माध्यम से मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से सीओपीडी के अचानक बढ़ने यानी एक्यूट एक्ससेर्बेशन और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में प्रभावी प्रबंधन के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण को महत्वपूर्ण बताया।
कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्राचार्य प्रो. स्मृति अरोड़ा ने सीओपीडी के समग्र प्रबंधन में स्टाफ नर्सों की भूमिका को अहम बताया। उन्होंने नर्सिंग दक्षताओं को मजबूत करने के लिए संरचित, व्यावहारिक और सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में पल्मोनरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. गिरीश सिंधवानी और डॉ. रुचि दुआ ने भी संबोधित किया।
विशेषज्ञों ने दिए आधुनिक उपचार के प्रशिक्षण
चार दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने सीओपीडी की रोकथाम, जोखिम कारकों की पहचान, स्पाइरोमेट्री, ऑक्सीजन थेरेपी, विभिन्न इनहेलेशन डिवाइस, नॉन-इनवेसिव एवं इनवेसिव वेंटिलेशन, पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन, सह-रुग्णताओं के प्रबंधन और ब्रोंकोस्कोपी सहित विभिन्न विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए।
प्रशिक्षण को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रखते हुए केस आधारित चर्चाओं और विभिन्न प्रकार के हैंड्स-ऑन सिमुलेशन अभ्यासों को भी शामिल किया गया। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को सीओपीडी के मरीजों की पहचान और उपचार के साथ-साथ गंभीर एवं आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर प्रबंधन के लिए व्यावहारिक रूप से दक्ष किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों में सीओपीडी की पहचान और उपचार की क्षमता को मजबूत करना तथा मरीजों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना रहा।
Reported By: Arun sharma












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