उत्तरखण्ड के परम्परागत फसल पर अब भारत सरकार अपनी निग़ाह रख कर उसके वाणिज्य उपयोग पर काम करेगा। उत्तराखण्ड के मिलेट्स को परखने और उनका वाणिज्यिक उपयोग पर भारत सरकार काम करेगी। गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने पिछले दिनों इस बावत वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल से लंबी मंत्रणा की थी। वाणिज्य मंत्रालय की एक टीम अब पहले क्षेत्र गढ़वाल का दौरा कर इसकी ज़मीनी वास्तविकता को तलाश करेगी। पहाड़ में मिलेट्स, हल्दी, जड़ी-बूटियों और इस तरह के प्राकृतिक रूप से उपजाए जाने वाले खाद्य उत्पादों को किस तरह से दुनिया भर के बाजारों में पहुंचाया जा सकता है इसका अध्ययन कर रिपोर्ट देश के वाणिज्य मंत्रालय को सौपेंगी। और अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा तो गढ़वाल सहित उत्तरखण्ड के किसानों को इसका सीधा लाभ मिल सकेगा इन उत्पादों की GI टैगिंग करके इसकी ब्रांडिंग भी संभव हो सकेगी।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री श्री पीयूष गोयल ने इस पर अपनी सहमति दे दी है। गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने बताया कि केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय की एक टीम इस संदर्भ में गढ़वाल का दौरा करेगी। यह टीम जिलाधिकारियों और काश्तकारों से बात करेगी और यहाँ प्राकृतिक रूप से उपजाए जाने वाले विशेष कृषि उत्पादों के बारे में भी जानेगी ताकि इन उत्पादों को दुनिया के बड़े बाजारों में उतारा जा सके।
उन्होंने कहा कि सब योजनाबद्ध तरीके से हुआ तो पहाड़ की अर्थव्यवस्था बदलने के साथ किसानों की स्थिति बदलेगी और दुनिया भर में गढ़वाल की एक अलग पहचान भी कायम होगी।
Reported By: Praveen Bhardwaj












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