15 सितम्बर 2025 को लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने उत्तराखण्ड के राज्यपाल पद पर अपने 4 वर्ष पूर्ण किए। पदभार संभालते ही उन्होंने राज्य के लिए पाँच प्रमुख मिशन तय किए—रिवर्स पलायन, महिला सशक्तीकरण एवं बालिका शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं तकनीकी, जैविक एवं प्राकृतिक कृषि और वेलनेस। इन क्षेत्रों में उन्होंने निरंतर नवाचार और पहलें कीं।
उच्च शिक्षा में सुधार
उनके मार्गदर्शन में वन यूनिवर्सिटी वन रिसर्च पहल शुरू हुई, जिसके तहत सभी विश्वविद्यालयों ने सामाजिक-आर्थिक विकास पर शोध प्रस्तुत किए। कॉलेज एफिलिएशन पोर्टल और यूनिवर्सिटी कनेक्ट तथा यूनिसंगम मोबाइल एप से शिक्षा जगत में पारदर्शिता और संवाद बढ़ा। कुलपति चयन प्रक्रिया में वीडियो रिकॉर्डिंग लागू कर उन्होंने पारदर्शिता को नई दिशा दी।
तकनीकी और डिजिटल पहलें
राजभवन में एआई आधारित ऑटोमेशन सिस्टम, मैत्री चैटबॉट, चारधाम यात्रा डैशबोर्ड, गार्गी नारी शक्ति और इटरनल गुरु चैटबॉट जैसी पहलें की गईं। राजभवन वर्चुअल टूर और इन्वेंटरी मैनेजमेंट सिस्टम ने पारदर्शिता और तकनीकी उपयोग को बढ़ावा दिया।
सामाजिक पहलें
राज्यपाल ने टीबी मुक्त भारत अभियान में सक्रिय भागीदारी की और स्वयं 67 टीबी रोगियों के निःक्षय मित्र बने। राजभवन में बालिका आत्मरक्षा एवं कंप्यूटर प्रशिक्षण केन्द्र, आरोग्यधाम, परिवार मिलन कार्यक्रम और स्वास्थ्य-जागरूकता सेमिनारों की शुरुआत हुई।
पर्यावरण और सांस्कृतिक पहलें
ग्रीन राजभवन के अंतर्गत जल संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा मिला। राजभवन में नक्षत्र वाटिका, बोनसाई गार्डन और गौशाला की स्थापना कर उन्होंने आध्यात्मिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को संजोया।
चार वर्षों में सभी जिलों और वाइब्रेंट विलेज का दौरा कर राज्यपाल ने जमीनी स्तर पर संवाद स्थापित किया। उनकी पहलें न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता की मिसाल हैं, बल्कि शिक्षा, तकनीक, समाज और पर्यावरण के संतुलित विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही हैं।
Reported By: Arun Sharma














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