
इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) ने 10 से 15 अक्टूबर 2026 के बीच दिल्ली में प्रदर्शनों की कवरेज कर रहे पत्रकारों की कथित हिरासत, मारपीट, उत्पीड़न और पत्रकारिता के कार्य में बाधा डालने की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई है। फेडरेशन ने कहा कि सार्वजनिक घटनाओं की स्वतंत्र और निर्भीक रिपोर्टिंग करना पत्रकारों का संवैधानिक एवं पेशेवर दायित्व है। किसी प्रदर्शन से असहमति के आधार पर पत्रकारों के साथ हिंसा, मनमानी हिरासत या उनके काम में बाधा डालना स्वीकार्य नहीं है।
फेडरेशन ने 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च को भी अनुचित बताते हुए कहा कि लंबित न्यायिक मामलों से संबंधित शिकायतों का समाधान स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए। हालांकि, किसी प्रदर्शन का विरोध हिंसा, अत्यधिक बल प्रयोग या प्रेस की स्वतंत्रता पर रोक लगाने का औचित्य नहीं बन सकता।
जंतर-मंतर पर स्थापना दिवस कार्यक्रम स्थगित
IFWJ ने दिल्ली की मौजूदा स्थिति और दिल्ली पुलिस एवं सरकार की एडवाइजरी को देखते हुए 28 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित अपना केंद्रीय स्थापना दिवस कार्यक्रम स्थगित कर दिया है। इस कार्यक्रम में देशभर की राज्य इकाइयों से एक हजार से अधिक पत्रकारों के शामिल होने की उम्मीद थी।
फेडरेशन के अनुसार, अब 28 अक्टूबर को स्थापना दिवस देशभर में राज्य मुख्यालयों पर मनाया जाएगा। वहीं, वर्ष के अंत में दिल्ली में संयुक्त राष्ट्रीय समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें सभी राज्यों के पत्रकार भाग ले सकेंगे।
30 पत्रकारों को हिरासत में लेने का आरोप
फेडरेशन ने दावा किया कि 10 और 11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने कम से कम 30 पत्रकारों को हिरासत में लिया। इनमें फ्रीलांस पत्रकारों के साथ भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के संवाददाता भी शामिल थे। आरोप है कि पत्रकारों ने अपनी पहचान बताई थी, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में लिया गया।
IFWJ ने प्रत्येक मामले में हिरासत के कानूनी आधार, अवधि और संबंधित पत्रकारों की वर्तमान स्थिति का सार्वजनिक विवरण जारी करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि पत्रकारों को उनके पेशेवर दायित्वों का निर्वहन करने से रोकना प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर विषय है।
महिला पत्रकार रिचा पराशर की शिकायत पर कार्रवाई की मांग
IFWJ ने वन इंडिया की पत्रकार रिचा पराशर की शिकायत का भी संज्ञान लिया है। शिकायत के अनुसार, 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के पास मार्च की कवरेज के दौरान उनके साथ कथित रूप से बदसलूकी की गई।
फेडरेशन ने महिला पत्रकारों के यौन उत्पीड़न और धमकाने से जुड़े आरोपों पर तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष, संवेदनशील और समयबद्ध जांच होनी चाहिए। संगठन ने संज्ञेय अपराधों में एफआईआर दर्ज करने में देरी को गंभीर चिंता का विषय बताया।
IFWJ ने मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने, निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने तथा शिकायतकर्ता को किसी भी प्रकार की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से सुरक्षा देने की मांग की है। संगठन ने स्पष्ट किया कि मामले का फैसला उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के आधार पर होना चाहिए।
व्यापक पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की मांग
फेडरेशन ने एक बार फिर व्यापक पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की मांग दोहराई है। संगठन के अनुसार, प्रदर्शन स्थलों, आपदा प्रभावित क्षेत्रों, संघर्ष क्षेत्रों और न्यायालय परिसरों में रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ता है। राजनीतिक, व्यावसायिक और प्रशासनिक हितों से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग के दौरान भी पत्रकारों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है।
IFWJ ने प्रस्ताव दिया कि पत्रकार सुरक्षा कानून में स्थायी, अनुबंधित, फ्रीलांस, डिजिटल और क्षेत्रीय भाषा के पत्रकारों को शामिल करते हुए कार्यरत पत्रकार की स्पष्ट परिभाषा तय की जाए। इसके साथ ही हमले, यौन उत्पीड़न, धमकी, गैरकानूनी हिरासत और पेशेवर उपकरणों की जब्ती या नुकसान से सुरक्षा का प्रावधान हो।
संगठन ने पत्रकारों की पहचान सत्यापित करने के लिए पुलिस के स्पष्ट प्रोटोकॉल, एफआईआर के समयबद्ध पंजीकरण, पुलिस या राजनीतिक पदाधिकारियों पर लगे आरोपों की स्वतंत्र जांच तथा पत्रकारों के गोपनीय सूत्रों की सुरक्षा की मांग भी उठाई है। इसके अलावा, पत्रकारों के घायल होने, दिव्यांग होने या कर्तव्य निर्वहन के दौरान मृत्यु होने की स्थिति में मुआवजा, चिकित्सा सहायता और परिवारों के लिए कल्याणकारी सहायता उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया है।
फेडरेशन ने शिकायत निवारण, सुरक्षा उपायों, सामाजिक सुरक्षा और कानून के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए राष्ट्रीय पत्रकार परिषद गठित करने की भी मांग की। संगठन का कहना है कि ये सुरक्षा उपाय कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावी बनाए रखने के लिए जरूरी हैं।
कार्यरत पत्रकारों के लिए अलग वैधानिक व्यवस्था बहाल करने की मांग
IFWJ ने कार्यरत पत्रकार अधिनियम, 1955 और कार्यरत पत्रकार (मजदूरी की दरों का निर्धारण) अधिनियम, 1958 को निरस्त किए जाने के बाद पत्रकारों के लिए अलग वैधानिक सुरक्षा व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।
फेडरेशन के मुताबिक, इन कानूनों के माध्यम से पत्रकारों को वेतन, सेवा शर्तों, अवकाश, ग्रेच्युटी और बकाया राशि की वसूली जैसे मामलों में संरक्षण मिलता था। संगठन का दावा है कि व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य-स्थिति संहिता, 2020 के तहत 21 नवंबर 2025 से इन दोनों अधिनियमों के निरस्त होने के बाद पत्रकारिता से जुड़े कर्मचारियों के लिए विशिष्ट वैधानिक संरक्षण का अभाव पैदा हुआ है।
फेडरेशन का कहना है कि यदि पत्रकारों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों के बीच अंतर स्पष्ट करना है, तो पत्रकारों की पहचान और उनके अधिकारों के लिए पारदर्शी एवं एकसमान वैधानिक व्यवस्था उपलब्ध करानी होगी।
राष्ट्रीय पत्रकार रजिस्टर बनाने का प्रस्ताव
IFWJ ने पत्रकारों की पहचान के लिए राष्ट्रीय रजिस्टर बनाने की अपनी पुरानी मांग भी दोहराई है। संगठन ने स्पष्ट किया कि यह रजिस्टर लाइसेंसिंग, सेंसरशिप या राजनीतिक आधार पर पत्रकारों की छंटनी का माध्यम नहीं बनना चाहिए, बल्कि पत्रकारों की पहचान सत्यापित करने वाली पारदर्शी और अधिकार-आधारित व्यवस्था होनी चाहिए।
प्रस्ताव के अनुसार, रजिस्टर में प्रत्येक पत्रकार को विशिष्ट पहचान संख्या देने, पंजीकृत मीडिया संस्थान, प्रेस क्लब या मान्यता प्राप्त पत्रकार यूनियन से जुड़ाव अथवा स्वतंत्र पत्रकारिता के प्रलेखित कार्य का सत्यापन करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
इसमें स्टाफ पत्रकारों, फ्रीलांसरों, डिजिटल पत्रकारों, फोटो-पत्रकारों, कैमरा पर्सन, संपादकों और क्षेत्रीय भाषा के संवाददाताओं के लिए स्पष्ट श्रेणियां निर्धारित करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही, गोपनीयता एवं डेटा संरक्षण, आवेदन अस्वीकार होने पर अपील और समय-समय पर नवीनीकरण की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
फेडरेशन के अनुसार, ऐसा रजिस्टर पुलिस, अदालतों और सरकारी विभागों को वास्तविक पत्रकारों की पहचान करने में मदद करेगा। साथ ही पत्रकारों की पहचान को केवल प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की मान्यता तक सीमित रखने की आवश्यकता नहीं होगी।
IFWJ अध्यक्ष गोपाल मिश्रा ने दोहराईं मांगें
IFWJ के अध्यक्ष गोपाल मिश्रा ने कहा कि दिल्ली की परिस्थितियों और आधिकारिक एडवाइजरी को ध्यान में रखते हुए 28 अक्टूबर का केंद्रीय स्थापना दिवस कार्यक्रम स्थगित किया गया है। राज्य इकाइयां अपने-अपने मुख्यालयों पर स्थापना दिवस मनाएंगी, जबकि राष्ट्रीय समारोह वर्ष के अंत में आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने महिला पत्रकारों के उत्पीड़न से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच, एफआईआर के तत्काल पंजीकरण और रिचा पराशर की शिकायत पर शीघ्र कार्रवाई की मांग की। उन्होंने सीसीटीवी एवं डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और शिकायतकर्ता को प्रतिशोध से सुरक्षा देने पर भी जोर दिया।
मिश्रा ने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक पत्रकार सुरक्षा कानून, कार्यरत पत्रकारों के लिए अलग वैधानिक संरक्षण की बहाली और राष्ट्रीय पत्रकार रजिस्टर की स्थापना जरूरी है। फेडरेशन ने केंद्र सरकार से इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार कर पत्रकारों की स्वतंत्रता, सुरक्षा और पेशेवर अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने की अपील की है।
Reported By: Arun Sharma













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