परमार्थ निकेतन में आज भगवान श्री हरि विष्णु के तृतीय अवतार वराह जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने विशेष पूजन, अर्चन और यज्ञ कर भगवान वराह अवतार की आराधना की।
शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु ने वराह रूप धारण कर पृथ्वी माता को असुरों और समुद्र से मुक्त कर धर्म और न्याय की रक्षा की। यह अवतार सृष्टि-संतुलन, साहस और धर्म पालन का संदेश देता है।

स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने कहा कि वराह अवतार शक्ति और विवेक के समन्वय का प्रतीक है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी धर्म, सत्य और न्याय का मार्ग न छोड़ें तथा समाज और पर्यावरण के संतुलन में योगदान दें।
कार्यक्रम के अंत में सभी को भगवान श्री वराह की जयंती पर शुभकामनाएँ दी गईं और उनके आशीर्वाद से सुख, शांति व समृद्धि की कामना की गई।
Reported By: Arun Sharma














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