उत्तराखंड में 1 जुलाई से मदरसा शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लागू हो गया है। राज्य में अब मदरसा शिक्षा बोर्ड का अस्तित्व समाप्त हो गया है और इसकी सभी जिम्मेदारियां राज्य अल्पसंख्यक शिक्षण प्राधिकरण को सौंप दी गई हैं। इसके साथ ही प्रदेश के सभी पंजीकृत मदरसों की मान्यता, निगरानी, पाठ्यक्रम और प्रशासनिक व्यवस्था अब प्राधिकरण के अधीन संचालित होगी।
राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम मदरसा शिक्षा में गुणवत्ता सुधार और छात्रों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। नई व्यवस्था के तहत मदरसों में एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। साथ ही विज्ञान, गणित, अंग्रेजी और अन्य आधुनिक विषयों की पढ़ाई को भी प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धी शिक्षा का लाभ मिल सके।
प्रदेश में वर्तमान में 452 पंजीकृत मदरसे संचालित हैं, जिनकी निगरानी और संचालन की जिम्मेदारी अब राज्य अल्पसंख्यक शिक्षण प्राधिकरण के पास होगी। हालांकि नई व्यवस्था के क्रियान्वयन के साथ कई चुनौतियां भी सामने हैं। इनमें मदरसों का समयबद्ध पंजीकरण, प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता, आधारभूत शैक्षणिक सुविधाओं का विकास तथा हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई को निर्बाध रूप से जारी रखना प्रमुख है।
इसके अलावा प्रदेश में संचालित करीब 500 अपंजीकृत मदरसों के भविष्य को लेकर भी स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इन संस्थानों को लेकर आगे की प्रक्रिया और नियमन को लेकर सरकार जल्द निर्णय ले सकती है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था लागू होने के बावजूद किसी भी छात्र की शिक्षा प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। सरकार का दावा है कि इस बदलाव से मदरसा शिक्षा अधिक पारदर्शी, आधुनिक और रोजगारोन्मुख बनेगी तथा विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध होंगे।
मुफ्ती शमून कासमी, अध्यक्ष उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड
Reported By: Praveen Bhardwaj












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