Friday, July 31, 2026
  • About
  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions
  • Contact
  • Disclaimer
Crime Patrol
  • उत्तराखंड
  • राजनीती
  • हेल्थ
  • विश्व
  • रोजगार
  • मनोरंजन
  • फैशन
  • पर्यटन
  • धार्मिक
  • त्‍योहार
  • अर्थव्यवस्था
  • अपराध
No Result
View All Result
Crime Patrol
No Result
View All Result
Home राष्ट्रीय

नारंगी अर्थव्यवस्था: जनजातीय कला, हस्तशिल्प और आजीविका

जनजातीय आजीविका लंबे समय से ज्ञान और पारंपरिक प्रथाओं पर आधारित रही है, जहां रचनात्मकता शिल्प, परंपरा, वस्त्र, संगीत, नृत्य, कथा-वाचन और भाषाओं में निहित है।

Crime Patrol by Crime Patrol
April 28, 2026
in राष्ट्रीय
Reading Time: 1 min read
0 0
A A
0
Handicrafts
1
VIEWS

वर्शांग खैयर मणिपुर के उखरूल जिले के लॉन्गपी गाँव के निवासी हैं, जो अपने और अपने परिवार की रोजी-रोटी गाँव में उपलब्ध गारे और सर्पेंटीनाइट पत्थर से बर्तन बनाकर कमाते हैं। स्थानीय तांगखुल नागा जनजातियों के अनुसार, यह पारंपरिक शिल्प, देवी पंथोइबी की कृपा है और आज यह उनकी आय का मुख्य स्रोत है और इसने छोटे से गाँव को वैश्विक मानचित्र पर ला दिया है। इसी तरह, नॉर्थी कुट्टन, जो तमिलनाडु के उद्हगमंडलम जिले के पागलकोड मंड गाँव में रहते हैं, पारंपरिक कढ़ाई कला से अपनी आजीविका कमा रहे हैं। इस कढ़ाई कला का उपयोग नीलगिरी के हरे-भरे जंगलों में बसे टोडा जनजाति समूह द्वारा किया जाता है। जीआई टैग से युक्त यह शिल्प प्रकृति और सामुदायिक बंधन का जश्न मनाता है और इसे बहुत ही सुंदरता के साथ टेबल मैट, रनर, जैकेट आदि पर अंकित किया जाता है और समकालीन उपयोग में इसे लोकप्रियता भी मिली है। खैयर और कुट्टन दोनों अपने पारंपरिक जनजातीय कला रूपों के एक उन्नत रूप का अभ्यास करके सालाना लगभग 6-8 लाख रुपये कमाते हैं।

जनजातीय आजीविका लंबे समय से ज्ञान और पारंपरिक प्रथाओं पर आधारित रही है, जहां रचनात्मकता शिल्प, परंपरा, वस्त्र, संगीत, नृत्य, कथा-वाचन और भाषाओं में निहित है। ये केवल उत्पाद या सेवाएं नहीं हैं, बल्कि ज्ञान की जीवित विरासत हैं, जो पीढ़ियों के माध्यम से आगे बढ़ती हैं। जनजातीय समुदायों के पास मौजूद रचनात्मक संपत्तियों का महत्वपूर्ण आर्थिक मूल्य है, जिसे यदि परंपरा के प्रति संवेदनशील रहते हुए सतत तरीके से उपयोग किया जाए, तो यह नारंगी अर्थव्यवस्था (ऑरेंज इकोनॉमी) को गति दे सकता है और इस इकोसिस्टम के तहत आय उत्पन्न करने वाली गतिविधियों का सृजन कर सकता है।

रचनात्मक अर्थव्यवस्था को दर्शाने के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली नारंगी अर्थव्यवस्था, यूएनसीटीएडी (संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन) के अनुमान के अनुसार 2 ट्रिलियन डॉलर से 2.25 ट्रिलियन डॉलर के बीच है, जो वैश्विक जीडीपी का लगभग 3.1% है। भारत में, जहाँ हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए ठोस डेटा मौजूद है, वहीं जनजातीय शिल्प और आजीविका के लिए डेटा की कमी है। हालांकि, रणनीतिक निहितार्थ स्पष्ट है: जनजातीय कला और शिल्प कुछ ऐसी ग्रामीण आजीविकाएं हैं, जो वैश्विक रचनात्मक वस्तुएँ की मांग से सीधे जुड़ सकती हैं यदि प्रामाणिकता, लॉजिस्टिक्स और गुणवत्ता प्रणाली मौजूद हों।

अनुमान है कि भारत की अनुसूचित जनजाति की आबादी 104 मिलियन है और कुल आबादी में इसकी हिस्सेदारी लगभग 8.6% है। लगभग 700 अलग-अलग जनजातीय समुदाय विभिन्न पारिस्थितिक क्षेत्रों में निवास करते हैं: जंगल, पहाड़, मैदान और सीमा क्षेत्र। इस विविधता का प्रत्यक्ष आर्थिक संबंध है। यह पारिस्थितिकी के अनुसार शिल्प विशेषज्ञता को प्रतिबिंबित करता है, जैसे जंगल वाले क्षेत्रों में बांस और छड़ी, खनिज क्षेत्रों में धातु और मिट्टी, और बुनाई गलियारों में वस्त्र परंपराएँ। इसके परिणामस्वरूप, भारत के जनजातीय क्षेत्र; एकल जनजातीय शिल्प क्षेत्र के बजाय “विविध अर्थव्यवस्थाओं” से युक्त हैं। इसलिए, नीति निर्माण क्षेत्रीय रूप से भिन्न होना चाहिए और “सभी के लिए उपयुक्त एक ही शिल्प योजना” नहीं होनी चाहिए। नीतियों को कच्चे माल की सीमाओं, डिज़ाइन और गुणवत्ता संबंधी मुद्दों और बाजार संबंधों को ध्यान में रखना चाहिए।

वर्तमान में, जनजातीय कला/हस्तशिल्प आजीविका इकोसिस्टम, कई मंत्रालयों और संस्थानों के कार्यादेशों से बना है, जो विभिन्न स्तरों पर एक-जैसे हैं। जनजातीय कार्य मंत्रालय इस इकोसिस्टम का मुख्य स्तंभ है और विकास के लिए अत्यंत आवश्यक अवसंरचना में सुधार करता है और ट्राइफेड (भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड) के माध्यम से बाजार-जुड़ाव की सुविधा देता है। ट्राइफेड एक प्रमुख बाजार संचालक के रूप में कार्य करता है। ट्राइफेड वन धन विकास केंद्रों (वीडीवीके) का समर्थन करता है, जो खरीद और मूल्य संवर्धन के लिए जमीनी स्तर की इकाइयाँ हैं। ट्राइफेड, ट्राइब्स इंडिया आउटलेट और आदि महोत्सव/हाट्स के माध्यम से खुदरा विपणन करता है ताकि उत्पादकों को खरीदारों और संस्थागत भागीदारों से जोड़ा जा सके। वस्त्र मंत्रालय राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम (एनएचडीपी) के माध्यम से हस्तशिल्प को बढ़ावा देता है और समग्र हथकरघा/हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजनाओं (सीएचसीडीएस) के माध्यम से क्लस्टर अवसंरचना को प्रोत्साहन देता है और कारीगरों के डेटाबेस को अद्यतन करता है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) पारंपरिक उद्योग पुनरुत्थान निधि योजना (स्फूर्ति) के माध्यम से क्लस्टर पुनरुत्थान और बिक्री-योग्यता का समर्थन करता है, स्पष्ट रूप से आपूर्ति-संचालित मॉडल के बदले बाज़ार-संचालित मॉडल का उपयोग करता है और ई-कॉमर्स को एक माध्यम के रूप में महत्व देता है।

अनुभव से पता चलता है कि ग्रामीण आजीविका मूल्य-श्रृंखला चुनौतीपूर्ण है क्योंकि ये कमजोर हैं, कारीगर सीधे बाजार से जुड़े नहीं होते हैं और मध्यस्थों पर अधिक निर्भर रहते हैं। ये कारक लाभ कम कर देते हैं तथा खराब भंडारण और एकत्रीकरण की वजह से अर्थव्यवस्था के विस्तार को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यदि हम विश्लेषण को कारीगर परिवारों के स्तर तक और गहराई से देखें, तो जो पैटर्न दिखाई देता है वह मिश्रित अर्थव्यवस्था का है। कारीगर शिल्प कार्य को सहायक या अंशकालिक रोजगार के रूप में देखते हैं, विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों में, जहां कृषि मौसम-आधारित है या परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है। इस परिस्थिति में, खराब ऋण पात्रता और उद्यम विकास, बाजार से जुड़ाव की कमी और व्यापारियों पर निर्भरता से आय प्रवाह अनियमित हो जाता है।

हालांकि, शिल्प कम पूंजी में घर पर उत्पादित किए जा सकते हैं, जिनमें उच्च लाभ की संभावना भी हो सकती है। शिल्प हस्तक्षेप अक्सर महिलाओं के रोजगार, आय और सौदेबाजी की शक्ति से जुड़े कार्यक्रम होते हैं। मोटे अनुमान बताते हैं कि 7 मिलियन से अधिक कारीगरों में महिलाओं की हिस्सेदारी 56% से 70% से अधिक हैं और हथकरघा क्षेत्र के बुनकरों में 72.29% महिलाएं हैं। कौशल हस्तांतरण अनौपचारिक होता है और आमतौर पर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को दिया जाता है। जनजातीय कला रूपों के लिए, जहां तकनीक और आख्यान में सांस्कृतिक अर्थ निहित होता है, वहाँ हस्तांतरण दोनों तरह का होता है—आर्थिक (कौशल) और सांस्कृतिक (प्रामाणिकता)।

इसे भी पढ़ें

Tribute

द्रास में कारगिल के वीरों को नमन, रक्षा मंत्री ने दोहराया ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ का संकल्प

July 26, 2026
Tribute

कारगिल के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि, राज्यपाल ने वीर नारियों का किया सम्मान

July 26, 2026
Dharmendra Pradhan

नीट पेपर लीक मामला: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, युवाओं की भावनाओं का दिया हवाला

July 25, 2026
CM Dhami

प्रधानमंत्री का संदेश युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ाने वाला: सीएम धामी

July 25, 2026

जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत तीन मौजूदा मॉडल मजबूत जुड़ाव के उपाय प्रदान करते हैं: वीडीवीके जैसी उत्पादनकर्ता समितियाँ, जो साझा अवसंरचना और संग्रहण प्रदान करती हैं; ट्राइब्स इंडिया स्टोर जो खरीदार से जोड़ने में मदद करते हैं और राज्य स्तर पर क्लस्टर विकास और कौशल उन्नयन के लिए सहकारी संस्थाएँ। उदाहरण के लिए, ओडिशा में 150 वीडीवीके कार्यरत हैं जिनकी कुल बिक्री ₹2,459.91 लाख है और जिसमें लगभग 40,000 जनजातीय उत्पादकों को एकीकृत किया गया है। जनजातीय विकास सहकारी निगम एक उच्च स्तरीय सहकारी संस्था है, जो जनजातीय उत्पादकों द्वारा तैयार किये गये वन और गैर-वन आधारित वस्तुओं के विपणन और ब्रांडिंग का कार्य करती है।

यह भारत के लिए एक मुख्य रणनीतिक सिफारिश को रेखांकित करता है: नारंगी अर्थव्यवस्था में जनजातीय कला/हस्तशिल्प को बेहतर क्षेत्रीय लेखांकन, लागू करने योग्य प्रामाणिकता/नैतिक व्यापार संरचना, और उत्पादक-संचालित वितरण की आवश्यकता है, जो मध्यस्थों के प्रभाव को कम करता हो। लघु-अवधि के लिए भारत ट्राइब्स फेस्ट जैसे त्योहारों को खरीद संभावना तथा उत्पाद कैटलॉग के मानकीकरण और डिजिटलीकरण के रूप में देखा जाना चाहिए एवं राष्ट्रीय एसटी वित्त विकास निगम और पीएम विश्वकर्मा जैसी योजनाओं के माध्यम से ऋण समर्थन को खरीदार आदेशों के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए। हालांकि, दीर्घ-अवधि के लिए सरकार को एक जनजातीय रचनात्मक अर्थव्यवस्था उपग्रह विवरण बनाने, निर्यात स्तर की अनुपालन और ब्रांड संरचना स्थापित करने और जनजातीय कला के लिए भारत-उपयुक्त नैतिक व्यापार संहिता तैयार करने पर विचार करना होगा। इन उपायों के माध्यम से, जनजातीय नारंगी अर्थव्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों से उभरकर विकसित भारत @2047 की यात्रा में शामिल हो जाएगी।

Ranjana Chopra

Previous Post

उत्तराखंड के डिटेक्टिव देव को ‘भारत विभूषण सम्मान 2026’ में जांच उत्कृष्टता पुरस्कार

Next Post

जनगणना 2027 कार्यों की समीक्षा, आईडी कार्ड पहनकर फील्ड में उतरने के निर्देश

Next Post
Meeting

जनगणना 2027 कार्यों की समीक्षा, आईडी कार्ड पहनकर फील्ड में उतरने के निर्देश

Meeting

नारी शक्ति को निर्णय मंचों पर भरपूर अवसर मिलें: डॉ. धन सिंह रावत

Discussion about this post

RECOMMENDED NEWS

CDO Abhinav Shah

सीडीओ अभिनव शाह ने दिव्यांग बालक गृह का निरीक्षण, ट्रैक सूट वितरित

7 months ago
Parmarth Niketan

परमार्थ निकेतन में भारत की पहली “माँ शबरी रामलीला” का शुभारम्भ

10 months ago
DM Chamoli

जिलाधिकारी चमोली ने जिले के कुरुड़ में नंदा देवी राजजात की समीक्षा बैठक की

12 months ago
Aag

उत्तरकाशी में फ़िताड़ी गांव में अग्निकांड, राहत बचाव कार्य जारी

4 months ago

FOLLOW US

BROWSE BY CATEGORIES

  • Blog
  • अन्तर्राष्ट्रीय
  • अपराध
  • अर्थव्यवस्था
  • उत्तर प्रदेश
  • उत्तराखंड
  • त्‍योहार
  • दिल्ली
  • दुर्घटना
  • देहरादून
  • धार्मिक
  • पर्यटन
  • पुलिस
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • राजनीती
  • राष्ट्रीय
  • रोजगार
  • विश्व
  • शिक्षा
  • हेल्थ

POPULAR NEWS

  • Congress

    अग्निपथ योजना रद्द करने को कांग्रेस का आंदोलन

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • मुख्यमंत्री धामी ने मां माया देवी मंदिर से छड़ी यात्रा का किया शुभारंभ

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • मानव उत्थान सेवा समिति ने चलाया स्वच्छ भारत अभियान

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • CBI की जांच की मांग को लेकर कांग्रेस करेगी कूच

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • देहरादून में भव्य रामलीला महोत्सव 2025

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Crime Patrol Logo

Crime Patrol is a trusted website that brings you real crime stories, latest news, health updates, and trending topics from around the world. Our mission is to spread awareness through true incidents, police investigations, and social issues that impact everyday life. We also provide useful health tips, wellness advice, and lifestyle content to help you stay informed and safe. Updated daily with verified and engaging content, Crime Patrol keeps you connected with reality. Whether it’s a shocking crime case or essential health info – we deliver news that matters.

Follow us on social media:

Recent News

  • हल्द्वानी में बन सकता है सिल्क पार्क, कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कराई फिजिबिलिटी स्टडी के निर्देश
  • सीएम धामी ने हेल्पलाइन-1905 की समीक्षा की, शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण के दिए सख्त निर्देश
  • उत्तरकाशी पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 7.54 ग्राम स्मैक के साथ दो युवक गिरफ्तार

Category

  • Blog
  • अन्तर्राष्ट्रीय
  • अपराध
  • अर्थव्यवस्था
  • उत्तर प्रदेश
  • उत्तराखंड
  • त्‍योहार
  • दिल्ली
  • दुर्घटना
  • देहरादून
  • धार्मिक
  • पर्यटन
  • पुलिस
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • राजनीती
  • राष्ट्रीय
  • रोजगार
  • विश्व
  • शिक्षा
  • हेल्थ

Recent News

Meeting

हल्द्वानी में बन सकता है सिल्क पार्क, कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कराई फिजिबिलिटी स्टडी के निर्देश

July 30, 2026
Meeting

सीएम धामी ने हेल्पलाइन-1905 की समीक्षा की, शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण के दिए सख्त निर्देश

July 30, 2026
  • About
  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions
  • Contact
  • Disclaimer

© 2025 All Rights Reserved By: Crime Patrol

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • उत्तराखंड
  • राजनीती
  • हेल्थ
  • विश्व
  • रोजगार
  • मनोरंजन
  • फैशन
  • पर्यटन
  • धार्मिक
  • त्‍योहार
  • अर्थव्यवस्था
  • अपराध

© 2025 All Rights Reserved By: Crime Patrol