भारतीय नौसेना दिवस 2025 के अवसर पर परमार्थ निकेतन परिवार ने राष्ट्र की समुद्री सीमाओं की रक्षा में समर्पित सभी वीर नौसैनिकों को श्रद्धा और सम्मान के साथ नमन किया। परमार्थ निकेतन ने कहा कि विशाल सागर की अनिश्चित लहरों और विपरीत परिस्थितियों के बीच देश की सुरक्षा करने वाले ये योद्धा भारत की मर्यादा के सुदृढ़ प्रहरी हैं।
सनातन मूल्यों और राष्ट्रभक्ति की गहन परंपरा वाले परमार्थ निकेतन में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के सान्निध्य में गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने भारतीय नौसेना के वीरों की सुरक्षा और कल्याण के लिए विशेष प्रार्थना की। निकेतन ने संदेश दिया कि “राष्ट्र-सेवा ही सर्वोत्तम साधना है”, और नौसैनिकों का तप, अनुशासन और त्याग इसी आदर्श का उत्कृष्ट उदाहरण है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारतीय नौसेना केवल सैन्य शक्ति नहीं, बल्कि भारत माता की वह अडिग ढाल है जो देश की समुद्री सीमाओं, व्यापारिक मार्गों और वैश्विक हितों की रक्षा करती है। उन्होंने शहीद नौसैनिकों को भी भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी, जिनका बलिदान भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
स्वामी जी ने नौसेना परिवारों के धैर्य और त्याग की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इन परिवारों की मौन तपस्या ही नौसैनिकों के संकल्प को शक्ति देती है।
परमार्थ निकेतन ने अंत में संदेश दिया कि भारत का हर हृदय, हर साधक और हर संत भारतीय सेना, विशेषकर नौसेना के अदम्य पराक्रम को नमन करता है।
Reported By: Arun Sharma














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