पर्यावरण संरक्षण, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और सतत विकास की दिशा में 130 इन्फैंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) इकोलॉजिकल कुमाऊँ ने जनपद पिथौरागढ़ के भूस्खलन प्रभावित देवल गांव में 10 हजार पौधों का विशेष वृक्षारोपण अभियान चलाया। अभियान में राज्य वन विभाग, पूर्व सैनिकों, स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सक्रिय भागीदारी कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।
देवल गांव भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है, जहां हर वर्ष मानसून के दौरान भूस्खलन और बोल्डर गिरने की घटनाएं होती रहती हैं। पिछले वर्ष एक बालक की घर पर बोल्डर गिरने से हुई मृत्यु के बाद क्षेत्र में आपदा जोखिम कम करने के लिए विशेष प्रयास शुरू किए गए। इसी उद्देश्य से ढालों को स्थिर करने, मृदा अपरदन रोकने, भू-क्षरण नियंत्रित करने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए यह वृक्षारोपण अभियान संचालित किया गया।
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उल्लेखनीय है कि बटालियन ने पिछले वर्ष भी इसी क्षेत्र में लगभग 10 हजार पौधे लगाए थे, जिनके सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं। इस वर्ष का अभियान उसी दीर्घकालिक प्रयास का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र को अधिक सुरक्षित और हरित बनाना है।
कार्यक्रम में ऊर्जा राज्य मंत्री गणेश भंडारी, प्रभागीय वनाधिकारी अशुतोष सिंह (आईएफएस), विकास खंड अधिकारी, जलागम परियोजना अधिकारी, थाना प्रभारी जाजरदेवल, आपदा प्रबंधन अधिकारी सहित अनेक प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
130 इन्फैंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) इकोलॉजिकल कुमाऊँ पिछले तीन दशकों से उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में वनीकरण और पर्यावरण संरक्षण का कार्य कर रही है। बटालियन अब तक 2.54 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण और संरक्षण कर चुकी है, जिससे लगभग 23,500 हेक्टेयर क्षेत्र में हरित आवरण विकसित हुआ है। बटालियन ने 75 प्रतिशत से अधिक पौधों की जीवितता सुनिश्चित कर वन संरक्षण, मृदा संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन और जैव विविधता के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
इस अवसर पर पिथौरागढ़ नगर निगम की महापौर कल्पना देवलाल ने पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए 130 इन्फैंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) इकोलॉजिकल कुमाऊँ को ‘प्रशंसा प्रमाण-पत्र’ प्रदान कर सम्मानित किया।
अभियान के आयोजकों ने कहा कि यह पहल केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी के साथ आपदा जोखिम को कम करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक दीर्घकालिक प्रयास है, जिससे आने वाले वर्षों में देवल क्षेत्र अधिक सुरक्षित और पर्यावरणीय रूप से समृद्ध बन सकेगा।
Reported By: Arun Sharma












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