UPI ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे आम लोगों और व्यापारियों से जुड़ा मुद्दा बताया है।
प्रीतम सिंह ने कहा कि सरकार ने ही लोगों को अधिक से अधिक डिजिटल और UPI के माध्यम से लेनदेन के लिए प्रोत्साहित किया था। इसके बाद बड़ी संख्या में लोगों और व्यापारियों ने UPI को भुगतान के प्रमुख माध्यम के रूप में अपनाया। अब UPI लेनदेन पर शुल्क की व्यवस्था सामने आने से व्यापारियों और आम लोगों पर इसके प्रभाव को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने सरकार पर फैसलों में असंगतता का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया गया और अब शुल्क की व्यवस्था लाई जा रही है। प्रीतम सिंह ने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की।
केंद्र सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सभी पर्सन-टू-पर्सन (P2P) UPI लेनदेन पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे। वहीं ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान भी MDR से मुक्त रहेंगे। सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत P2M लेनदेन इस व्यवस्था से अप्रभावित रहेंगे।
नए ढांचे के तहत ₹2,000 से अधिक के कुछ निर्धारित व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। सरकार के मुताबिक यह शुल्क ग्राहकों से वसूलने के लिए नहीं है, बल्कि भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और अन्य प्रतिभागियों के बीच वितरित किया जाएगा।
कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह ने सरकार से इस पूरी व्यवस्था पर पुनर्विचार करने और शुल्क संबंधी प्रावधान को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बाद उस पर अतिरिक्त शुल्क की व्यवस्था व्यापारियों के हित में नहीं है।
प्रीतम सिंह, वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं अध्यक्ष, चुनाव अभियान समिति
Reported By: Shiv Narayan











Discussion about this post