Himalayan Institute of Medical Sciences (हिम्स) जौलीग्रांट में आयोजित दूसरे राष्ट्रीय सम्मेलन रासकॉन-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। ईएनटी विभाग की रिहैबिलिटेशन यूनिट ऑफ स्पीच एंड हियरिंग द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में देशभर से आए विशेषज्ञों ने स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजी के क्षेत्र में नवीनतम शोध, अत्याधुनिक तकनीकों और उपचार पद्धतियों पर गहन चर्चा की।
कार्यक्रम का आयोजन आदि कैलाश सभागार में किया गया, जहां संस्थापक स्वामी राम के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर उद्घाटन किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. ए.के. देवरारी ने कहा कि आज के समय में श्रवण और वाणी से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि इम्प्लांट्स, एआई आधारित हियरिंग एड्स और उन्नत डायग्नोस्टिक उपकरणों के जरिए मरीजों को अधिक सटीक और प्रभावी उपचार मिल रहा है, जिससे भविष्य में चिकित्सा गुणवत्ता और बेहतर होगी।
विशिष्ट अतिथि डॉ. ए. शरीफ ने कहा कि बढ़ती वृद्ध आबादी के साथ सुनने और बोलने से जुड़ी समस्याओं में इजाफा होगा, जिससे ऑडियोलॉजी और स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजी का महत्व और बढ़ जाएगा।
आयोजन समिति के चेयरमैन डॉ. एस.एस. बिष्ट ने कहा कि रासकॉन-2026 विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए एक साझा मंच प्रदान कर रहा है, जहां ज्ञान और नवाचार का आदान-प्रदान हो रहा है। यह सम्मेलन युवा प्रतिभाओं को अपने शोध प्रस्तुत करने और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेने का अवसर भी दे रहा है।
आयोजक सचिव अर्चना दास और विकास कुमार ने बताया कि दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर से करीब 170 प्रतिनिधि शामिल हुए। वैज्ञानिक सत्रों में वेस्टिबुलर असेसमेंट, इलेक्ट्रो-अकूस्टिक स्टिमुलेशन (EAS), बोन कंडक्शन इम्प्लांट्स, कॉक्लियर इम्प्लांट्स, ऑडियोलॉजी उपकरणों में प्रगति और उन्नत ऑडियोलॉजी केंद्रों की जरूरतों पर विस्तार से चर्चा की गई।
इसके अलावा एआई आधारित भारतीय हियरिंग एड्स और टिनिटस प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने शोध और अनुभव साझा किए। सम्मेलन का उद्देश्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से मरीजों को बेहतर और सुलभ उपचार उपलब्ध कराना है।
Reported By: Arun sharma












Discussion about this post