उत्तरकाशी जिले में मानसून की सक्रियता के बीच गंगा-भागीरथी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। पिछले वर्ष धराली क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदा के बाद खीरगाड़ से भारी मात्रा में मलबा भागीरथी नदी में आने के कारण नदी का तल ऊंचा हो गया है। इसके चलते हर्षिल क्षेत्र के पास झील जैसी स्थिति बन रही है, जिससे आसपास के कई महत्वपूर्ण भवनों और आबादी वाले क्षेत्रों पर खतरा मंडराने लगा है।
प्रशासन के अनुसार बढ़ते जलस्तर से हर्षिल, बागोरी, गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) के पर्यटन आवास गृह तथा लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है। पूर्व में नदी किनारे किए गए कुछ सुरक्षात्मक कार्य तेज बहाव के कारण क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे स्थायी सुरक्षा के लिए आरसीसी सुरक्षा कार्य कराने की योजना तैयार की है। इसी क्षेत्र से मां गंगा के शीतकालीन प्रवास के लिए प्रस्तावित सड़क का निर्माण भी किया जाना है। अधिकारियों का कहना है कि मानसून समाप्त होते ही इन दोनों कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाएगा।
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि पिछले वर्ष खीरगाड़ में आई आपदा के दौरान भारी मात्रा में मलबा भागीरथी नदी में जमा हो गया था, जिससे नदी का तल ऊपर उठ गया है। यही कारण है कि वर्तमान में जलस्तर बढ़ने पर हर्षिल क्षेत्र में झील जैसी स्थिति बन रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और मानसून के बाद स्थायी सुरक्षा कार्यों को तेजी से पूरा किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
प्रशांत आर्य जिलाधिकारी उत्तरकाशी












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