ऋषिकेश में मां गंगा और भगवान शिव की पावन धरती पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में कथावाचक देवी चित्रलेखा जी के श्रीमुख से भक्ति और ज्ञान की धारा प्रवाहित हो रही है। आज के आयोजन में परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। स्वामीजी के उद्बोधन ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक, सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन के मूल्यों पर नए दृष्टिकोण से विचार करने की प्रेरणा दी।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि देवी चित्रलेखा जी की कथा शैली सहज, गहन और हृदयस्पर्शी है। उन्होंने बताया कि श्रीमद् भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शक है, जो हमें प्रेम, करुणा, संयम और सेवा का संदेश देता है। उन्होंने वर्तमान समय में बढ़ते तनाव, हिंसा और पर्यावरण संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि इन समस्याओं का समाधान आंतरिक जागृति और आध्यात्मिकता से संभव है।
कार्यक्रम में देवी चित्रलेखा जी के भजनों ने वातावरण को भक्तिमय और अलौकिक बना दिया। कथा के अंत में स्वामीजी ने जीवन में सत्य, सेवा, सत्संग और पवित्र विचारों को अपनाने का आह्वान किया। जांगिड सेवा संघ, मुंबई द्वारा आयोजित यह कथा ज्ञानयज्ञ समाज में आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का उत्कृष्ट उदाहरण है। अंत में स्वामीजी ने देवी चित्रलेखा जी और संघ के पदाधिकारियों को रुद्राक्ष का पौधा भेंट कर हरित कथाओं का संदेश भी दिया।
Reported By: Arun Sharma














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