उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर जौनसार-बावर क्षेत्र में ग्रामीणों का विरोध तेज होता जा रहा है। 15 सितंबर को छह राज्यों के बीच परियोजना को आगे बढ़ाने को लेकर समझौता होने के बाद क्वानू और आसपास के गांवों में ग्रामीणों ने आंदोलन शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने परियोजना से प्रभावित होने वाली पुश्तैनी जमीन, घर, खेती और सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान को लेकर चिंता जताई है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास या बांध परियोजना के विरोध में नहीं हैं, लेकिन प्रस्तावित स्थान और बांध की ऊंचाई को लेकर उनकी आपत्ति है। उनका कहना है कि परियोजना के मौजूदा स्वरूप में आगे बढ़ने से क्षेत्र के कई गांव और लोगों की पुश्तैनी संपत्तियां संभावित डूब क्षेत्र में आ सकती हैं।
टोंस नदी पर प्रस्तावित है किशाऊ बांध
किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना टोंस नदी पर उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमा क्षेत्र में प्रस्तावित है। करीब 660 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना का उद्देश्य बिजली उत्पादन के साथ-साथ सिंचाई और पेयजल की जरूरतों को पूरा करना है। परियोजना से करीब 97 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराने की योजना बताई गई है।
परियोजना को लेकर जहां सरकार इसे ऊर्जा, सिंचाई और पेयजल के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रही है, वहीं स्थानीय ग्रामीण संभावित विस्थापन और डूब क्षेत्र को लेकर लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं।
ग्रामीणों की चिंताओं का परीक्षण होगा: सतपाल महाराज
ग्रामीणों की आपत्तियों को लेकर उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि सरकार के सामने जो भी बातें सामने आई हैं, उनका परीक्षण किया जाएगा और समाधान तलाशने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जलविद्युत परियोजनाएं राज्य के हित में महत्वपूर्ण हैं, लेकिन स्थानीय लोगों की चिंताओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि परियोजना से जुड़े स्थानीय मुद्दों और ग्रामीणों की आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए उनके समाधान की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।
सतपाल महाराज, पर्यटन मंत्री, उत्तराखंड
Reported By: Praveen Bhardwaj












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