भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) में बीआईएस चेयर और भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), नई दिल्ली के सहयोग से राष्ट्रीय भवन निर्माण मानक (एनबीसीएस 2026) पर कार्यशाला आयोजित की गई। जल संसाधन विकास एवं प्रबंधन (डब्ल्यूआरडीएम) के व्याख्यान कक्ष में आयोजित कार्यशाला में एनबीसीएस 2026 के प्रावधानों, उनकी प्रासंगिकता और प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेषज्ञों ने चर्चा की।
कार्यशाला में आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत मुख्य अतिथि रहे, जबकि बीआईएस के उप महानिदेशक (मानकीकरण) श्री संजय पंत ने उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की। कार्यक्रम में बीआईएस, आईआईटी रुड़की, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और पेशेवर समुदाय के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
आईआईटी रुड़की में बीआईएस चेयर प्रोफेसर प्रो. दीपक खरे ने स्वागत संबोधन में भारतीय मानकों के प्रति जागरूकता और उनकी व्यावहारिक समझ को बढ़ाने में ऐसी कार्यशालाओं की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने छात्रों को राष्ट्रीय मानकों से जोड़ने के लिए क्विज, कार्यशालाओं और संगोष्ठियों जैसी विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी भी दी।
बीआईएस के उप महानिदेशक श्री संजय पंत ने कहा कि राष्ट्रीय भवन निर्माण मानक 2026 देश में सुरक्षित, मजबूत और गुणवत्तापूर्ण निर्माण व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने कहा कि मानकों का अपेक्षित प्रभाव तभी हासिल किया जा सकता है, जब उनके प्रावधानों को सही तरीके से समझकर व्यवहार में प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। इसके लिए छात्रों, शिक्षकों, वास्तुकारों, अभियंताओं और अन्य हितधारकों के बीच जागरूकता और संवाद बढ़ाना जरूरी है।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत ने सुरक्षित, सुदृढ़ और सतत अवसंरचना के विकास के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मानक अनुसंधान, शिक्षा और क्षेत्रीय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी का काम करते हैं। बीआईएस के साथ सहयोग के माध्यम से आईआईटी रुड़की छात्रों और पेशेवरों को आधुनिक निर्माण पद्धतियों तथा मानकों की बेहतर समझ प्रदान करने की दिशा में कार्य कर रहा है।
कार्यशाला के दौरान श्री संजय पंत को राष्ट्रीय भवन संहिता (एनबीसी) के विकास और इसके लगातार उन्नयन में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। 35 वर्षों से अधिक के अनुभव वाले श्री पंत ने बीआईएस के विभिन्न मानकों के विकास, संशोधन और अद्यतन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कार्यक्रम में आयोजित तकनीकी सत्र में बीआईएस और पेशेवर समुदाय के विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर प्रस्तुतियां दीं। बीआईएस के वैज्ञानिक डी/संयुक्त निदेशक (सिविल इंजीनियरिंग) श्री अभिषेक पाल ने “राष्ट्रीय भवन निर्माण मानकों (एनबीसीएस 2026) का अवलोकन” विषय पर जानकारी दी। श्री संदीप गोयल ने “एनबीसीएस 2026 के अग्नि एवं जीवन सुरक्षा पहलू” पर प्रस्तुति दी, जबकि बीआईएस नई दिल्ली के मानक समन्वय एवं निगरानी विभाग (एससीएमडी) के प्रमुख श्री दीपक अग्रवाल ने “मानकीकरण में अकादमिक संस्थानों का महत्व” विषय पर विचार रखे।
तकनीकी सत्र के बाद ओपन-हाउस संवाद आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों ने विशेषज्ञों से सवाल पूछे और एनबीसीएस 2026 के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की। इससे मानकों के शैक्षणिक और व्यावसायिक उपयोग को लेकर संवाद को बढ़ावा मिला।
कार्यशाला में सिविल इंजीनियरिंग, भूकंप इंजीनियरिंग, आपदा प्रबंधन, डब्ल्यूआरडीएम, जलविज्ञान, एचआरईडी, रासायनिक इंजीनियरिंग और वास्तुकला सहित विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य, शोधकर्ता और छात्र शामिल हुए। इसके अलावा इन्फ्रास्ट्रक्चर वर्क्स विभाग (आईडब्ल्यूडी) और सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों ने भी सहभागिता की।
एनबीसीएस 2026 के प्रति छात्रों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आईआईटी रुड़की में 17 अगस्त को क्विज का आयोजन भी किया गया। इसमें प्रथम पुरस्कार के रूप में ₹15,000, द्वितीय पुरस्कार ₹10,000 और तृतीय पुरस्कार ₹5,000 तथा पांच सांत्वना पुरस्कारों के रूप में ₹2,000 की राशि निर्धारित की गई थी।
क्विज में प्रथम पुरस्कार राहुल भसीन (इंटरनेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर डैम्स), द्वितीय पुरस्कार सागर जायसवाल (सिविल इंजीनियरिंग विभाग) और तृतीय पुरस्कार अक्षत गुप्ता (जैव विज्ञान एवं जैव अभियांत्रिकी विभाग) ने प्राप्त किया। सांत्वना पुरस्कार रिशव कुमार, सुशांत राहुल, अनुभव अनुराज, मोहम्मद मेहदी नासेरी और आयुष मौर्य को दिए गए।
कार्यशाला ने बीआईएस, शिक्षा जगत और पेशेवर हितधारकों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। कार्यक्रम के माध्यम से सुरक्षित, सुदृढ़ और गुणवत्तापूर्ण निर्माण, अग्नि एवं जीवन सुरक्षा तथा मानकीकरण के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। आईआईटी रुड़की और बीआईएस की यह पहल देश में सुरक्षित एवं सतत अवसंरचना विकास के लिए राष्ट्रीय मानकों को शिक्षा, अनुसंधान और व्यावहारिक कार्यों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
Reported By: Arun Sharma












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