अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में सामुदायिक चिकित्सा विभाग द्वारा दो महत्वपूर्ण शोध अध्ययनों पर आधारित कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में उत्तराखंड के स्वास्थ्य एवं शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने कहा कि एम्स जनस्वास्थ्य और अनुसंधान के क्षेत्र में लगातार बेहतर कार्य कर रहा है और इसके दूरगामी लाभ आम जनता को मिलेंगे।
कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. मीनू सिंह ने सीपीपीसी प्रोजेक्ट और ठिंगनेपन में कमी से जुड़े अध्ययनों के निष्कर्ष साझा किए। सीपीपीसी के तहत विकसित एआई-आधारित डिजिटल उपकरण आशा कार्यकर्ताओं को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोगों और सामुदायिक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार के लिए मददगार साबित होगा।
कार्यशाला में बताया गया कि उत्तराखंड ने बच्चों में ठिंगनेपन की दर 2005 में 44% से घटाकर 2021 में 27% तक पहुंचाई है, जो देश में तीसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। विशेषज्ञों ने कहा कि तकनीक, सुशासन और बहु-क्षेत्रीय प्रयास मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
Reported By: Arun Sharma














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