सीलिंग भूमि यानी चाय बागान की भूमि के नाम पर आमजन के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए जन संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी के नेतृत्व में जिलाधिकारी आशीष चौहान से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनुपालना सुनिश्चित कराने की मांग की।
जिलाधिकारी ने मामले का संज्ञान लेते हुए अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) एवं उपजिलाधिकारी विकासनगर को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि देहरादून जनपद के एनफील्ड ग्रांट, जमनीपुर, एटनबाग, ईस्ट होप टाउन, बदामावाला, अंबाड़ी, रायपुर, जीवनगढ़, कंडोली, कांवली, हरबंसवाला, मोहकमपुर खुर्द, बंजारावाला माफी, आर्केडिया ग्रांट, मलूकावाला, मिट्ठी बहेड़ी, लाडपुर और नत्थनपुर समेत कई क्षेत्रों में चाय बागान/सीलिंग भूमि के नाम पर भवन स्वामियों और काश्तकारों को कथित तौर पर परेशान किया जा रहा है।
नेगी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने सिविल अपील संख्या 2697/1984 में 24 अक्टूबर 1996 को दिए आदेश में 10 अक्टूबर 1975 से पूर्व खरीदी गई भूमि के खरीदारों को उत्तर प्रदेश सीलिंग अधिनियम की धारा 6(3) के तहत सीलिंग एक्ट से मुक्त माना था। उनका आरोप है कि इसके बावजूद जिला प्रशासन की ओर से एक जनहित याचिका के संदर्भ में उत्तर प्रदेश ग्रामीण सीलिंग आरोपण अधिनियम की धारा 6(1)(घ) एवं 6(2) के तहत 12 जुलाई 2023 और 16 मई 2023 के आदेशों के माध्यम से तहसीलों को संबंधित भूमि के क्रय-विक्रय पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए।
मोर्चा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि इस आदेश के चलते उन लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिन्होंने 10 अक्टूबर 1975 से पहले भूमि खरीदी थी। उन्होंने कहा कि भूमि की खरीद-फरोख्त और दाखिल-खारिज पर रोक के कारण ऐसे लोग भी प्रभावित हो रहे हैं, जो कथित तौर पर सीलिंग कानून की परिधि में नहीं आते।
नेगी ने कहा कि जिला प्रशासन को किसी भी भूमि के संबंध में कार्रवाई करने से पहले उसके खरीद के वर्ष, स्वामित्व, बैनामा/रजिस्ट्री और वास्तविक कानूनी स्थिति की जांच करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना दस्तावेजों की पड़ताल किए एक समान आदेश लागू करने से आमजन के साथ-साथ अधिवक्ताओं को भी परेशानी हो रही है और सरकार को राजस्व की हानि उठानी पड़ रही है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी मुख्य भूस्वामी ने सीलिंग की जद में आने वाली भूमि को 10 अक्टूबर 1975 से पहले बेच दिया था और बाद में उस खरीदार ने भूमि किसी अन्य व्यक्ति को बेची, तो प्रत्येक मामले की वास्तविक स्थिति दस्तावेजों के आधार पर निर्धारित की जानी चाहिए।
जन संघर्ष मोर्चा ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में कोई भूमि वास्तव में सीलिंग कानून की जद में आती है तो जिला प्रशासन को उस पर विधि सम्मत कार्रवाई करनी चाहिए। मोर्चा ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश और संबंधित कानूनों के प्रावधानों के अनुरूप प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच कर प्रभावित लोगों को राहत दी जाए।
Reported By: Arun Sharma












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