नेपाल में हालिया प्राकृतिक आपदा के बाद उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में संभावित आपदाओं को लेकर सरकार और विशेषज्ञ संस्थाएं सतर्क हो गई हैं। पहाड़ों में अचानक बाढ़, तेज जलप्रवाह और मौसम में तेजी से होने वाले बदलावों से निपटने के लिए चमोली जिले के संवेदनशील वसुंधरा ताल में अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसका उद्देश्य संभावित खतरे की स्थिति में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों तक समय रहते चेतावनी पहुंचाना है।
केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI), रुड़की की ओर से तैयार किए जा रहे इस प्रोजेक्ट में आधुनिक सेंसर, कैमरे और ऑटोमेटिक रेन गेज लगाए जाएंगे। इनके जरिए वसुंधरा ताल के जलस्तर, पानी के बहाव की गति, बारिश, तापमान, बर्फबारी और हवा की रफ्तार समेत कई महत्वपूर्ण मानकों की लगातार निगरानी की जाएगी।
सीबीआरआई रुड़की के निदेशक प्रोफेसर प्रदीप कुमार के मुताबिक उत्तराखंड सरकार के साथ समन्वय कर परियोजना का प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही विशेषज्ञों की टीम वसुंधरा ताल पहुंचकर निगरानी स्टेशन स्थापित करेगी। सिस्टम से मिलने वाला डाटा रियल टाइम में बेस स्टेशन तक पहुंचाया जाएगा।
विशेषज्ञ अलग-अलग संभावित आपदा परिदृश्यों का पहले से अध्ययन करेंगे। इसी आधार पर ऐसी चेतावनी प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे खतरे की स्थिति में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को करीब एक घंटे पहले अलर्ट किया जा सके। यानी पहाड़ों में खतरा बढ़ने से पहले ही संभावित प्रभावित क्षेत्रों तक सूचना पहुंचाने का प्रयास होगा।
सीबीआरआई के अनुसार यह स्वदेशी तकनीक कम से कम एक मौसम चक्र तक परीक्षण के दौर से गुजरेगी। फिलहाल सिस्टम का परीक्षण संस्थान परिसर में किया जा रहा है। परीक्षण सफल रहने और परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद विशेषज्ञों की टीम वसुंधरा ताल में सिस्टम स्थापित करने के लिए रवाना होगी।
यदि यह परियोजना सफल रहती है तो भविष्य में इसे उत्तराखंड के अन्य संवेदनशील हिमालयी क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है। इससे अचानक आने वाली बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान समय रहते चेतावनी जारी कर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
प्रोफेसर प्रदीप कुमार, निदेशक CBRI रुड़की
Reported By: Praveen Bhardwaj












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