देहरादून/हरिद्वार: समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर देश में इतिहास रचने वाले उत्तराखंड से एक और बड़ा और ऐतिहासिक मामला सामने आया है। यूसीसी कानून के तहत देश में पहली बार ‘हलाला’ कुप्रथा से जुड़ा एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। हरिद्वार जिले में दर्ज हुए इस पहले मामले को उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने एक शानदार और ऐतिहासिक कदम बताया है।
उन्होंने कहा कि यह कानून अब उन तथाकथित ठेकेदारों पर बड़ी लगाम लगाएगा जो धर्म की आड़ में महिलाओं पर जुल्म ढाते थे।
पुनर्विवाह के लिए नहीं होगी कोई शर्त, पुलिस ने किया साफ
वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने इस कानूनी कार्रवाई का स्वागत करते हुए स्पष्ट किया कि यूसीसी के आने से अब मुस्लिम महिलाओं को सामाजिक और कानूनी सुरक्षा मिल गई है। उन्होंने इस पूरे विषय पर निम्नलिखित मुख्य बातें कहीं:
शर्तों पर पूरी तरह रोक: पुलिस ने दर्ज मामले में साफ कर दिया है कि पति-पत्नी के बीच दोबारा होने वाले निकाह (पुनर्विवाह) से पहले अब किसी भी तरह की शारीरिक या मानसिक शर्त लागू नहीं होगी।
पूरी तरह गैर-इस्लामिक प्रथा: हलाला की प्रथा पूरी तरह से गैर-इस्लामिक थी। कुछ स्वार्थी लोगों ने अपने निजी फायदों के लिए हमेशा से इस्लामी कानूनों की गलत और मनमानी व्याख्या की है।
महिलाओं पर जुल्म का अंत: किसी महिला को दोबारा शादी करने के लिए किसी तीसरे व्यक्ति के साथ संबंध बनाने (हलाला) की शर्त मानने को मजबूर करना सरासर जुल्म और अपराध था, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कार्रवाई के लिए पुलिस बाध्य: उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद अब अगर कोई भी व्यक्ति किसी महिला को पुनर्विवाह के लिए ऐसी किसी भी शर्त को मानने के लिए विवश करेगा, तो प्रदेश सरकार और पुलिस उस पर तत्काल सख्त कार्रवाई करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होगी।
तथाकथित लोगों द्वारा फैलाई जा रही गंदगी पर लगेगी लगाम
शादाब शम्स ने कहा कि यह कदम मुस्लिम समाज की उन पीड़ित महिलाओं के लिए न्याय और खुशी का पल है जो सदियों से इस कुप्रथा का दंश झेल रही थीं। यूसीसी के तहत हुई इस पहली कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि अब मजहब की आड़ में महिलाओं का शोषण करने वालों की खैर नहीं है। इस कानून के कड़ाई से पालन होने पर समाज में समानता आएगी और महिलाओं को उनके वास्तविक अधिकार मिल सकेंगे।
Reported BY : Rajesh Kumar













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