लंबे समय तक स्वास्थ्य खराब रहने के बाद करीब तीन महीने बाद उत्तराखंड लौटे पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत की राजनीतिक सक्रियता एक बार फिर चर्चा में है। उत्तराखंड लौटने के बाद हरिद्वार से लेकर देहरादून तक रावत कार्यकर्ताओं के बीच नजर आ रहे हैं। हाल ही में नारसन में समर्थकों ने उनका स्वागत किया और उन्हें ‘टाइगर’ कहकर संबोधित किया था।
मंगलवार को देहरादून में भी हरीश रावत कार्यकर्ताओं के साथ सक्रिय नजर आए। उन्होंने घंटाघर स्थित बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और उत्तराखंड आंदोलन के प्रणेता इंद्रमणि बडोनी की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उनके साथ मौजूद रहे।
‘न टाइगर, न चूहा और न भीगी बिल्ली’
कार्यकर्ताओं के बीच अपने चिर-परिचित अंदाज में हरीश रावत ने कहा कि वह आज भी वैसे ही हैं, जैसे चार साल पहले थे। उन्होंने कहा, “मैं न टाइगर हूं, न चूहा और न भीगी बिल्ली। मैं हरीश रावत हूं और हरीश रावत ही रहूंगा।”
रावत ने कहा कि पिछले लंबे समय में उनके सामने कई तरह की परिस्थितियां आईं, लेकिन उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी रही हों, उन्होंने कार्यकर्ताओं और पार्टी के प्रति अपने जुड़ाव को कायम रखा है।
‘यह शक्ति प्रदर्शन नहीं, कार्यकर्ताओं को धन्यवाद देने का कार्यक्रम’
अपने कार्यक्रम को लेकर रावत ने इसे शक्ति प्रदर्शन मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि उन कार्यकर्ताओं को धन्यवाद देने के लिए था, जिन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में उनका साथ दिया।
गौरतलब है कि उत्तराखंड लौटने के बाद रावत लगातार कार्यकर्ताओं के संपर्क में हैं। सोमवार को उन्होंने देहरादून में विभिन्न सिद्धपीठों के दर्शन भी किए और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को अपनी राजनीतिक गतिविधियों के केंद्र में बताया।
इस बीच रावत की सक्रियता ऐसे समय में बढ़ी है, जब उनके पूर्व सहयोगी से जुड़े मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति में चर्चा चल रही है। सितंबर में रावत ने कांग्रेस के कुछ संगठनात्मक पदों से इस्तीफे की पेशकश की थी।
अब उत्तराखंड वापसी के बाद रावत की लगातार सक्रियता और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी मौजूदगी ने प्रदेश कांग्रेस के सियासी माहौल को फिर चर्चा में ला दिया है।
हरिश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ नेता कांग्रेस।
Reported By: Rajesh Kumar













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