सुरंग हादसे के करीब 17 दिनों बाद शुक्रवार सुबह सुरक्षित बाहर निकाले गए संजय साह ने नेपाल सेना के अधिकारियों से बातचीत में हादसे के दौरान के भयावह हालात बयां किए। सुरंग से बाहर आने के बाद संजय ने बताया कि वह कंट्रोल रूम में ऑपरेटर के रूप में काम करते थे और हादसा होते ही उनकी पहली प्राथमिकता अंदर मौजूद लोगों की जान बचाना थी।
संजय साह के मुताबिक, आमतौर पर कंट्रोल रूम में चार से छह लोग ही मौजूद रहते थे, लेकिन हादसे के समय वहां करीब 40 से 45 लोग मौजूद थे। हादसा होते ही उन्होंने सभी लोगों को खतरे के बारे में आगाह किया और सुरक्षित बाहर निकलने के लिए कहा।
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उन्होंने बताया, “मैं अकेले भाग नहीं सकता था। सबकी जान बचाना मेरी जिम्मेदारी थी। सबको आगाह करने और बाहर निकालने में मेरा समय लग गया और आखिर में मैं खुद बाहर नहीं निकल पाया।”
संजय ने बताया कि इसके बाद वह सुरंग के अंदर ही फंस गए। जिंदगी और मौत के बीच लंबे समय तक संघर्ष करते हुए उन्होंने महामंत्र का जाप किया और हिम्मत बनाए रखी। उन्होंने आशंका जताई कि पावरहाउस और सुरंग के अन्य हिस्सों में भी लोग फंसे हो सकते हैं। पानी भर जाने के कारण सभी के सुरक्षित बचने की संभावना भी उन्होंने कम बताई।
17 दिन बाद मिला दूसरा जीवन
शुक्रवार सुबह जब संजय साह को सुरंग से सुरक्षित बाहर निकाला गया तो यह उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। बातचीत के दौरान जब उन्हें बताया गया कि आज 19 तारीख है और वह इतने लंबे समय बाद बाहर आए हैं, तो उनके इस बच निकलने को उनके “दूसरे जीवन” के तौर पर देखा गया।
संजय साह की कहानी इस हादसे के बीच हिम्मत, जिम्मेदारी और मानवता की मिसाल बनकर सामने आई है। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना पहले अन्य लोगों को खतरे से बचाने की कोशिश की और अंततः खुद भी जिंदगी की जंग जीतकर सुरक्षित बाहर निकल आए।
Reported By: Praveen Bhardwaj














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