AIIMS Rishikesh में अंगदान को लेकर चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। संस्थान में अब तक 22 किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं, जिससे कई मरीजों को नया जीवन मिला है।
नेफ्रोलॉजी विभाग की डॉ. शैरोन कंडारी और यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर मित्तल के अनुसार, पिछले तीन वर्षों से चल रहे सतत जनजागरूकता अभियानों के चलते लोग अंगदान के प्रति आगे आ रहे हैं।
संस्थान में अप्रैल 2023 से किडनी ट्रांसप्लांट शुरू हुआ, जिसके बाद हर वर्ष प्रत्यारोपण की संख्या में वृद्धि हुई है। इसके अलावा दो मामलों में केडवरिक ऑर्गन डोनेशन भी सफलतापूर्वक किया गया, जिससे कई जरूरतमंदों को लाभ मिला।
एम्स ऋषिकेश का आई बैंक भी लगातार सक्रिय है, जहां अब तक 1200 से अधिक कॉर्निया प्राप्त हुए हैं और सैकड़ों मरीजों को प्रत्यारोपण के माध्यम से दृष्टि मिल चुकी है। संस्थान ने देहदान और अंगदान को बढ़ावा देने के लिए व्यापक अभियान चलाए हैं, जिससे समाज में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है।
एम्स ऋषिकेश की निदेशक एवं सीईओ प्रोफेसर (डॉक्टर) मीनू सिंह ने बताया कि अंगदान (Organ Donation) एक महान और जीवनरक्षक कार्य है, जिसके माध्यम से एक व्यक्ति अपने अंगों को मृत्यु के बाद या कुछ परिस्थितियों में जीवित रहते हुए किसी अन्य व्यक्ति को दान कर सकता है। यह चिकित्सा विज्ञान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसने असंख्य लोगों को नया जीवन प्रदान किया है।
निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने बताया कि मानव शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग जैसे गुर्दे, हृदय, यकृत, फेफड़े, अग्न्याशय और आंत ऐसे होते हैं, जो गंभीर रूप से खराब होने पर व्यक्ति के जीवन के लिए खतरा बन सकते हैं। ऐसी स्थिति में अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplantation) ही जीवन बचाने का एकमात्र उपाय रह जाता है। अंगदान के माध्यम से एक व्यक्ति कई लोगों की जान बचा सकता है और उन्हें स्वस्थ जीवन जीने का अवसर दे सकता है।
एम्स निदेशक के मुताबिक अंगदान का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि दुनिया भर में लाखों लोग अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में हैं। भारत में भी बड़ी संख्या में मरीज ऐसे हैं जिन्हें गुर्दा, यकृत या हृदय प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है, लेकिन अंगदान की कमी के कारण उन्हें समय पर उपचार नहीं मिल पाता। इसलिए समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।
Reported By: Arun Sharma












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