लोक गायिका डॉ. रेशमा शाह ने अपने नए उत्तराखंडी गीत ‘पहाड़ घूमणा’ को केवल पर्यटन को बढ़ावा देने वाला गीत मानने से इनकार करते हुए इसे पलायन जैसी गंभीर समस्या के प्रति जागरूकता का माध्यम बताया। मसूरी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसके गांव, संस्कृति और लोक परंपराओं से है। यदि गांव आबाद रहेंगे, तभी पहाड़ों की असली पहचान भी सुरक्षित रह पाएगी।
उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में लोग रोज़गार और अन्य कारणों से गांव छोड़ रहे हैं ऐसे समय में संगीत के माध्यम से लोगों के मन में अपनी जन्मभूमि के प्रति अपनापन और जिम्मेदारी की भावना जगाना बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि कला समाज को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है।
डॉ. शाह ने जानकारी दी कि ‘पहाड़ घूमणा’ का पहला लोकार्पण मुंबई में सुप्रसिद्ध गायक अनूप जलोटा के जन्मदिवस समारोह के दौरान उनके आवास पर किया गया कार्यक्रम में फिल्म और संगीत जगत से जुड़ी कई हस्तियों ने भी शिरकत की उन्होंने बताया कि गीत सुनने के बाद अनूप जलोटा ने इसकी सराहना की और उनकी गायकी की प्रशंसा करते हुए भविष्य में एक भक्ति गीत पर साथ काम करने की इच्छा भी जताई
डॉ. रेशमा शाह ने कहा कि उनका प्रयास है कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली और प्राकृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए। उनका विश्वास है कि यदि लोग अपनी जड़ों से जुड़े रहेंगे, तो पलायन जैसी चुनौती का समाधान भी मजबूत होगा और उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रहेगी
लोक गायिका डॉ. रेशमा शाह
Reported By: Praveen Bhardwaj












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