
भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है। 75 वर्षीय नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर को गोवा स्थित आवास पर कार्डियक अरेस्ट के बाद निधन हो गया।
नाना पाटेकर के निधन पर परमार्थ निकेतन के पीठाधीश्वर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें भावांजलि और विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि देश ने एक ऐसे विलक्षण कलाकार को खो दिया, जिन्होंने अपने अभिनय से भारतीय सिनेमा में अलग पहचान बनाई और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभाया।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने नाना पाटेकर के साथ परमार्थ निकेतन और मां गंगा के पावन तट पर बिताए आत्मीय क्षणों को याद किया। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर का सहज अपनापन, सरल व्यवहार और बिना किसी आडंबर के लोगों से जुड़ जाने की उनकी शैली हमेशा स्मृतियों में जीवंत रहेगी।
उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर ने अभिनय को केवल निभाया नहीं, बल्कि उसे जिया। पांच दशकों से अधिक लंबे अभिनय करियर में उन्होंने विभिन्न प्रकार के किरदारों को पर्दे पर जीवंत किया। उनकी प्रभावशाली आवाज, संवाद अदायगी और आंखों के भाव उनकी अभिनय शैली की विशेष पहचान रहे। नाना पाटेकर ने ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘नटसम्राट’ और अन्य फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं तथा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों सहित कई सम्मान हासिल किए।
कला के साथ सामाजिक सरोकारों से भी जुड़े रहे नाना
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि नाना पाटेकर की पहचान केवल एक अभिनेता के रूप में नहीं थी। वे सामाजिक सरोकारों को लेकर भी संवेदनशील रहे। नाम फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने सूखे और आर्थिक संकट से जूझ रहे किसान परिवारों की मदद के लिए काम किया। सामाजिक कार्यों में उनकी सक्रियता ने उन्हें एक जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में भी पहचान दिलाई।
उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर के अनेक किरदारों में समाज की सच्चाई, मानवीय संघर्ष, रिश्तों की जटिलता और जीवन की वास्तविकताएं दिखाई देती थीं। उनका अभिनय दर्शकों को केवल मनोरंजन नहीं देता था, बल्कि उन्हें सोचने और समाज को नए नजरिए से देखने के लिए भी प्रेरित करता था।
परमार्थ निकेतन से रहा आत्मीय संबंध
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि नाना पाटेकर का परमार्थ निकेतन आना और मां गंगा की आरती में सहभागी बनना परमार्थ परिवार के लिए विशेष स्मृति है। गंगा तट पर उनके साथ बिताए आत्मीय क्षण अब हमेशा यादों का हिस्सा रहेंगे।
उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर भले ही आज देह रूप में हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके निभाए किरदार, उनकी कला, सामाजिक कार्य और उनसे जुड़ी स्मृतियां उन्हें लंबे समय तक जीवंत रखेंगी। उनके निधन से भारतीय कला जगत में एक ऐसी रिक्तता पैदा हुई है, जिसे भर पाना कठिन है।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने मां गंगा से प्रार्थना करते हुए कहा कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और नाना पाटेकर के परिवार, प्रियजनों तथा उनके असंख्य प्रशंसकों को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति और संबल प्रदान करें।
Reported By: Arun Sharrma













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