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दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि 1 अक्टूबर 2026 से एनसीआर क्षेत्र के सभी पेट्रोल पंपों पर ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ नियम लागू किया जाएगा। इसके तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) के बिना किसी भी वाहन को पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इस कदम से प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा और वायु गुणवत्ता में सुधार होगा। नए नियम का सीधा असर लाखों वाहन चालकों पर पड़ेगा, जिन्हें समय पर अपना प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवाना और नवीनीकृत कराना अनिवार्य होगा।
ANPR कैमरों से होगी निगरानी
नियम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एनसीआर क्षेत्र के 1,041 पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जाएंगे। ये कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन कर यह जांचेंगे कि संबंधित वाहन का पीयूसीसी वैध है या नहीं। यदि प्रमाणपत्र मान्य नहीं पाया गया तो वाहन को ईंधन नहीं दिया जाएगा।
प्रदूषण में 35 प्रतिशत तक कमी का लक्ष्य
सरकार ने इस वर्ष एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण के स्तर को 30 से 35 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से की जाएगी। मोबाइल ऐप, जीपीएस ट्रैकिंग, ऑनलाइन पोर्टल और डैशबोर्ड आधारित सिस्टम का उपयोग कर विभिन्न विभागों की गतिविधियों पर रियल टाइम निगरानी रखी जाएगी।
एनसीआर में चलेंगी 975 इलेक्ट्रिक बसें
सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए सरकार इलेक्ट्रिक बसों के संचालन पर भी विशेष जोर दे रही है। गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ में कुल 975 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का लक्ष्य तय किया गया है। वर्तमान में इन शहरों में लगभग 100 ई-बसें संचालित हो रही हैं। सरकार का उद्देश्य डीजल और पेट्रोल आधारित सार्वजनिक परिवहन को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों से प्रतिस्थापित करना है।
एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग नेटवर्क होगा मजबूत
एनसीआर क्षेत्र में वायु गुणवत्ता की निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए कुल 43 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें 25 स्टेशन पहले से संचालित हैं, जबकि 18 नए स्टेशन अक्टूबर 2026 तक शुरू कर दिए जाएंगे। इन स्टेशनों के माध्यम से हवा में मौजूद प्रदूषक तत्वों की लगातार निगरानी की जाएगी, जिससे समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
उद्योगों पर भी रहेगी कड़ी नजर
औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए 725 प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की पहचान की गई है। इनमें से 613 इकाइयों में ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) स्थापित किया जा चुका है। इन प्रणालियों को सीधे Central Pollution Control Board (CPCB) के सर्वर से जोड़ा गया है, जिससे उद्योगों से निकलने वाले उत्सर्जन की रियल टाइम निगरानी संभव हो सकेगी।
सरकार का कहना है कि इन उपायों के माध्यम से एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने और लोगों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की जा सकेगी।












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