चीन की कम्युनिस्ट सरकार द्वारा लागू किए गए “एथनिक यूनिटी एंड प्रोग्रेस लॉ” के विरोध में सोमवार को नैनीताल में तिब्बती समुदाय के लोगों ने विरोध जुलूस निकालकर अपना आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों ने इस कानून को तिब्बती संस्कृति, भाषा और पहचान पर हमला बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।
तिब्बती समुदाय का जुलूस मल्लीताल स्थित तिब्बती मार्केट से शुरू होकर बड़ा बाजार, मॉल रोड होते हुए तल्लीताल डांठ तक निकाला गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने तिब्बत के समर्थन और चीन की नीतियों के विरोध में नारेबाजी की तथा हाथों में तख्तियां लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने 1 जुलाई 2026 से “एथनिक यूनिटी एंड प्रोग्रेस लॉ” लागू किया है। उनका आरोप है कि इस कानून के माध्यम से चीन विभिन्न जातीय समुदायों पर जबरन मंदारिन भाषा, कम्युनिस्ट विचारधारा और ‘सिनिसाइजेशन’ (चीनीकरण) की नीति थोपना चाहता है।
तिब्बती समुदाय के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस कानून के जरिए तिब्बत की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, भाषा, परंपराओं और धार्मिक विरासत को कानूनी रूप से कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इसे तिब्बती समुदाय के मूल अधिकारों और सांस्कृतिक अस्तित्व पर गंभीर खतरा बताया।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि जब तक चीन इस कानून को वापस नहीं लेता, तब तक तिब्बती समुदाय लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपने विरोध को जारी रखेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस मुद्दे पर ध्यान देने और तिब्बती लोगों के सांस्कृतिक एवं मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाने की अपील की।
नैनीताल में निकाले गए इस विरोध मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र पुलिस बल भी तैनात रहा और कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
तेनजिन जिग्मे, तिब्बत युथ कांग्रेस सदस्य
शीरींग डोलमा, तिबत्ती महिला
Reported By: Praveen Bhardwaj











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