
उत्तराखंड में सीमांत और दुर्गम क्षेत्रों के किसानों, पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और मत्स्य पालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में पशुपालन विभाग और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के बीच हुआ समझौता महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बताया कि इस पहल के तहत पिछले दो वर्षों में ITBP के साथ करीब 17.5 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ है। इस व्यवस्था से स्थानीय उत्पादकों को सीधे बाजार उपलब्ध हो रहा है और उनकी आय बढ़ाने के अवसर मिल रहे हैं।
पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा के अनुसार, सीमांत क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने और पलायन रोकने के उद्देश्य से यह पहल शुरू की गई थी। उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जिसने स्थानीय किसानों और पशुपालकों से उत्पादों की खरीद को लेकर ITBP के साथ इस तरह का समझौता किया।
बिचौलियों के बिना सीधे खातों में पहुंच रहा भुगतान
मंत्री ने बताया कि ITBP किसानों, पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और मत्स्य पालकों से सीधे उनके उत्पाद खरीदती है। इस प्रक्रिया में किसी बिचौलिए या कमीशन एजेंट की भूमिका नहीं होती। उत्पादों की खरीद के बाद प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से 48 घंटे के भीतर भुगतान संबंधित लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच जाता है।
इस व्यवस्था से उत्पादकों को अपने उत्पाद बेचने के लिए एक सुनिश्चित बाजार मिल रहा है। साथ ही, समय पर भुगतान होने से उन्हें आर्थिक सहूलियत मिल रही है और उनकी आय में सीधा लाभ दर्ज किया जा रहा है।
पलायन रोकने और स्थानीय आजीविका को मजबूत करने पर जोर
सौरभ बहुगुणा ने कहा कि सीमांत और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका को मजबूत करना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है। स्थानीय स्तर पर उत्पादों की खरीद से किसानों और पशुपालकों को आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। सरकार की कोशिश है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अपने गांवों में ही रोजगार और आय के बेहतर अवसर मिलें, ताकि पलायन पर अंकुश लगाया जा सके।
सौरभ बहुगुणा, पशुपालन मंत्री, उत्तराखंड।
Reported By: Praveen Bhardwaj













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