रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने गुरुवार को रक्षा सेवाओं के लिए वित्तीय शक्तियों के संशोधित प्रत्यायोजन (Delegation of Financial Powers) को जारी किया। नए प्रावधानों के तहत चिकित्सा, निर्माण और रक्षा खरीद से जुड़ी वित्तीय शक्तियों में 100 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है, जबकि कुछ मामलों में यह वृद्धि दोगुनी से भी अधिक है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस निर्णय से सेना, नौसेना और वायुसेना के फील्ड कमांडरों की परिचालन क्षमता मजबूत होगी तथा अनुबंधों को अंतिम रूप देने और परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने में तेजी आएगी।
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल
संशोधित वित्तीय शक्तियों में स्वदेशीकरण और अनुसंधान एवं विकास (R&D) को विशेष प्राथमिकता दी गई है। सैन्य इकोसिस्टम के भीतर अनुसंधान एवं विकास के लिए प्रत्यायोजित वित्तीय शक्तियों को दोगुना कर दिया गया है। इसका उद्देश्य विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं (OEMs) पर निर्भरता कम करना और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
1.25 लाख करोड़ रुपये की खरीद को मिलेगी गति
रक्षा मंत्रालय के अनुसार संशोधित वित्तीय शक्तियों के माध्यम से चालू वित्तीय वर्ष में राजस्व मार्ग से 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की खरीद प्रक्रिया को सुगम बनाया जा सकेगा। इससे आवश्यक सैन्य उपकरणों और सेवाओं की उपलब्धता में तेजी आएगी।
कमांडरों को मिली अधिक वित्तीय शक्ति
सेना, वायुसेना और नौसेना के कमांडरों को दी गई विशेष वित्तीय शक्तियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। साथ ही तत्काल परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निर्धारित कुल वित्तीय सीमा को भी 100 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है।
नए प्रावधानों के तहत संयुक्त सेवा खरीद को प्रोत्साहित करने के लिए ‘लीड सर्विस’ व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। इसके अंतर्गत सामान्य खरीद की तुलना में अधिक वित्तीय शक्तियां प्रदान की गई हैं, जिससे विभिन्न सेनाओं के बीच समन्वित खरीद प्रक्रिया को बढ़ावा मिलेगा।
निर्णय प्रक्रिया होगी तेज
वस्तुओं और सेवाओं की खरीद को अधिक विकेंद्रीकृत और प्रभावी बनाने के लिए कई नए सक्षम वित्तीय प्राधिकरण (Competent Financial Authorities) भी गठित किए गए हैं। इससे विभिन्न स्तरों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और आवश्यक संसाधनों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।
2021 के बाद पहला बड़ा संशोधन
वित्तीय शक्तियों से संबंधित पिछली अधिसूचना वर्ष 2021 में जारी की गई थी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार रक्षा बलों के विस्तार, बढ़ती परिचालन आवश्यकताओं और बजटीय आवंटन में वृद्धि को देखते हुए इन शक्तियों में संशोधन आवश्यक हो गया था।
मंत्रालय का मानना है कि अक्टूबर 2025 में अधिसूचित संशोधित Defence Procurement Manual और नए वित्तीय प्रत्यायोजन मिलकर रक्षा खरीद प्रणाली को नई गति देंगे। इससे सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं के अनुरूप उपकरणों, सेवाओं और संसाधनों की उपलब्धता अधिक तेज और प्रभावी ढंग से सुनिश्चित की जा सकेगी।
Reported By: Praveen Bhardwaj












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