देवभूमि जल शक्ति कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन की बैठक बुधवार को चंदननगर स्थित मुख्यालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने की। बैठक में जल जीवन मिशन के तहत कार्य कर रहे ठेकेदारों के लंबित भुगतान, योजनाओं की स्थिति और विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताई गई।
अमित अग्रवाल ने बताया कि सचिव पेयजल, उत्तराखंड शासन से मुलाकात के बाद यह बैठक बुलाई गई। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से ठेकेदार सचिवालय, राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन (SWSM), जल निगम और जल संस्थान के लगातार चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक भुगतान नहीं हो सका है। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, जबकि ठेकेदार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एसोसिएशन ने सचिव से मांग की है कि उनके पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री और पेयजल मंत्री से जल्द मुलाकात कराई जाए, ताकि लंबित समस्याओं का समाधान हो सके। उनका कहना था कि भुगतान में लगातार हो रही देरी के कारण ठेकेदारों में भारी रोष है और स्थिति गंभीर होती जा रही है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन के तहत कार्य करने वाले ठेकेदारों, मजदूरों और सामग्री आपूर्तिकर्ताओं का आर्थिक संकट गहरा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने एमएल फाइल, आरपीडब्ल्यूएसएस आईडी, स्वजल आईडी, सुजलाम आईडी और एसएनए पोर्टल सहित विभिन्न प्रक्रियाओं में ठेकेदारों से पूरा सहयोग लिया, लेकिन इसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया।
उन्होंने दावा किया कि भारत सरकार से लगभग तीन महीने पहले 32 करोड़ रुपये प्राप्त होने के बावजूद राज्य सरकार उनका उपयोग नहीं कर सकी, क्योंकि स्पर्श पोर्टल पर योजनाओं का डेटा अपडेट नहीं है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यभर में जल जीवन मिशन के तहत करीब 2,000 करोड़ रुपये का भुगतान ठेकेदारों पर बकाया है।
अमित अग्रवाल ने कहा कि अधिकांश योजनाओं में ग्रामीणों को पिछले दो वर्षों से पेयजल आपूर्ति दी जा रही है और विभाग द्वारा उनसे बिल भी वसूले जा रहे हैं। बावजूद इसके ठेकेदारों का भुगतान लंबित है। उन्होंने यह भी कहा कि वन भूमि और राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित स्वीकृतियों में देरी तथा समय पर भुगतान न होना कई परियोजनाओं के अधूरे रहने का मुख्य कारण है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि टीपीआई (थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन) और हर घर जल प्रमाणीकरण ठेकेदारों के अनुबंध का हिस्सा नहीं है, फिर भी इनकी जिम्मेदारी भी ठेकेदारों पर डाली जा रही है। कई स्थानों पर ठेकेदारों ने स्वयं प्रयास कर 75 प्रतिशत तक प्रमाणीकरण कराया, जबकि अंतिम प्रमाणन ग्राम प्रधानों के माध्यम से होना है।
बैठक में ठेकेदारों ने चेतावनी दी कि भुगतान नहीं होने की स्थिति में वे योजनाओं के संचालन, अनुरक्षण और रखरखाव का कार्य नहीं करेंगे। उनका कहना था कि अब यदि किसी योजना को नुकसान होता है या पेयजल आपूर्ति प्रभावित होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और संबंधित अधिकारियों की होगी।
एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और जल शक्ति मंत्रालय से हस्तक्षेप कर जल जीवन मिशन के अंतर्गत लंबित भुगतान शीघ्र जारी करने की मांग की है, ताकि आर्थिक संकट से जूझ रहे ठेकेदारों को राहत मिल सके।
Reported By: Arun Sharma












Discussion about this post