परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने अमेरिका से क्रांतिकारी वीर बलिदानी खुदीराम बोस को उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि मात्र 18 वर्ष की आयु में हंसते-हंसते फांसी के फंदे को गले लगाकर खुदीराम बोस ने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए। उनका साहस और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का अमिट दीप है।
स्वामी जी ने कहा कि खुदीराम बोस केवल एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि एक विचार हैं, जो यह दर्शाता है कि साहस और देशभक्ति के लिए उम्र कोई बाधा नहीं है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में अपने कौशल, समय और ऊर्जा को समर्पित करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर परमार्थ निकेतन में यज्ञ और गंगा आरती उनके बलिदान को समर्पित की गई। मानसून के मौसम में स्वामी जी ने साधु-संतों, निराश्रितों और जरूरतमंद जीवों के लिए भोजन और आवास की व्यवस्था करने का भी संकल्प व्यक्त किया, और कहा कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म और साधना है।
Reported By: Arun Sharma














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