
सिखों के पवित्र तीर्थस्थल श्री हेमकुंट साहिब जी के कपाट बंद करने का शुभ समारोह आज श्रद्धा और भक्ति के भाव के साथ संपन्न हुआ। समारोह की शुरुआत सुखमनी साहिब के पाठ से हुई। इसके बाद श्री दरबार साहिब, अमृतसर के हजूरी रागी सिंह गुरदियाल सिंह और उनके जत्थे ने शबद कीर्तन प्रस्तुत किया। प्रतिकूल मौसम के बावजूद करीब 5,000 श्रद्धालुओं ने पवित्र गुरुद्वारे में मत्था टेककर अरदास की।
समारोह के दौरान यात्रा की अंतिम अरदास की गई। इसके पश्चात ‘बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के जयकारों के बीच श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को सम्मानपूर्वक शोभायात्रा के रूप में उनके शीतकालीन निवास सचखंड ले जाया गया। शोभायात्रा का नेतृत्व गढ़वाल स्काउट्स बैंड और 418 इंडिपेंडेंट इंजीनियर कोर के जवानों ने किया। सेना के जवानों ने समारोह के दौरान भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी भी संभाली।
ट्रस्ट ने सेना, पुलिस और प्रशासन का जताया आभार
गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन सरदार नरिंदरजीत सिंह बिंद्रा ने इस वर्ष की यात्रा को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं, भारतीय सेना, राज्य सरकार और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से पुलिस और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की सराहना करते हुए कहा कि यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उन्होंने यात्रा के सफल संचालन में योगदान देने वाले विभिन्न गुरुद्वारों के सेवादारों और कर्मचारियों का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि सेवादारों की निष्ठा और परिश्रम से ही इतनी बड़ी यात्रा सुचारु रूप से संपन्न हो सकी। इस दौरान उन्होंने जानकारी दी कि रतूड़ा गुरुद्वारा भी अब संगत के लिए खुल गया है।
ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सरदार सेवा सिंह ने भी सभी गुरुद्वारों में संगत की ओर से मिले सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के अनुशासन और सहयोग से यात्रा के दौरान व्यवस्थाओं का संचालन सुगमता से हो सका।
पाकिस्तान से आए 48 तीर्थयात्रियों ने भी किए दर्शन
इस वर्ष श्री हेमकुंट साहिब की यात्रा में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, यूरोप, मलेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर और दुबई सहित विभिन्न देशों से आए तीर्थयात्रियों ने पवित्र स्थल पर मत्था टेका।
समारोह का विशेष आकर्षण पाकिस्तान से आए 48 तीर्थयात्रियों का जत्था रहा। जत्थे में शामिल श्रद्धालुओं ने भी श्री हेमकुंट साहिब के दर्शन किए और कपाट बंद होने के धार्मिक समारोह के साक्षी बने।
बर्फबारी के बीच श्रद्धालुओं ने की अरदास
पिछले दिन से क्षेत्र में हल्की बर्फबारी शुरू होने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कमी नहीं दिखी। प्रतिकूल मौसम का सामना करते हुए करीब 5,000 श्रद्धालु कपाट बंद होने के अवसर पर श्री हेमकुंट साहिब पहुंचे और विनम्र भाव से प्रार्थना की।
कपाट बंद होने के साथ ही इस वर्ष की श्री हेमकुंट साहिब यात्रा संपन्न हो गई है। अब श्रद्धालुओं को अगले वर्ष ग्रीष्मकाल में यात्रा दोबारा शुरू होने का इंतजार रहेगा। ट्रस्ट के अनुसार, श्री हेमकुंट साहिब की यात्रा ग्रीष्म 2027 में पुनः आरंभ होगी।
Reported By: Arun Sharma













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