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एग्री स्टैक: भारत की डिजिटल कृषि क्रांति

कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनी हुई है। इस क्षेत्र में कुल श्रमशक्ति का लगभग 46 प्रतिशत हिस्सा जुटा हुआ है।

Crime Patrol by Crime Patrol
May 3, 2026
in राष्ट्रीय
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Agriculture
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कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनी हुई है। इस क्षेत्र में कुल श्रमशक्ति का लगभग 46 प्रतिशत हिस्सा जुटा हुआ है। पिछले दशक में सरकार की ओर से उत्पादन/उत्पादकता बढ़ाने, फसलों के विविधीकरण, खेती की लागत में कमी लाने, कृषि उत्पादों की बेहतर कीमत अर्जित करने, जलवायु के अनुकूल ढालने और जोखिमों को कम करने की बहुआयामी रणनीति के जरिए किसानों की आय बढ़ाने के ठोस प्रयास किए गए हैं। केन्द्र प्रायोजित या केन्द्रीय क्षेत्र की योजनाओं के जरिए किसानों को विभिन्न सेवाओं या लाभों की निर्बाध, पारदर्शी और कुशल आपूर्ति संघीय या राज्य स्तर की सरकार की प्राथमिकता है। कुल कृषि भूमि का स्वामित्व और उस भूमि पर बोई गई फसलों का इतिहास किसी भी योजना के लाभ के लिए किसी भी किसान (चाहे वह मालिक हो, पट्टेदार हो या फिर बटाईदार हो) की पात्रता के आकलन की जरूरी शर्त है। हालांकि, देश भर में भूमि से संबंधित प्रशासन में पायी जाने वाली व्यापक भिन्नताएं एक बड़ी चुनौती पेश करती हैं। स्वामित्व और बुवाई से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को संकलित करने वाले एक मानकीकृत किसान डेटाबेस के महत्व एवं जरूरत को पहचानते हुए, सरकार ने वर्ष 2024 में डिजिटल कृषि मिशन की शुरुआत की। किसानों के इस डेटाबेस को मजबूत सहमति तंत्र के साथ गतिशील रूप से अद्यतन किया जाता है। एग्री स्टैक, इस डिजिटल कृषि मिशन का एक प्रमुख स्तंभ है। यह अब इस मिशन के एक मौन लेकिन सशक्त परिवर्तनकारी स्तंभ के रूप में उभर रहा है।

इसमें तीन विवरणी (रजिस्ट्री) – खेत, किसान और बोई गई फसल – शामिल हैं। एग्री स्टैक भारत की कृषि से जुड़ी यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत का इशारा करता है। एक ऐसा अध्याय, जो प्रधानमंत्री के 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने के लक्ष्य के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। खेत वाली रजिस्ट्री में भौगोलिक संदर्भों के आधार पर कृषि भूखंडों का डेटाबेस शामिल होता है। इनमें से प्रत्येक भूखंड को एक अनूठी कृषि आईडी प्रदान की जाती है।

दूसरी परत में, प्रत्येक भूमि के मालिक किसान को एक अनूठी फार्म आईडी प्रदान की जा रही है। इस आईडी में स्वामित्व वाली प्रत्येक भूखंड से संबंधित जरूरी जानकारियों के साथ-साथ सह-स्वामित्व के मामले में हिस्सेदारी का उल्लेख भी शामिल है। यह डेटा अधिकार अभिलेख (रिकॉर्ड ऑफ राइट्स) से गतिशील रूप से जुड़ा हुआ है ताकि विरासत, बिक्री आदि के कारण स्वामित्व में हुआ कोई भी बदलाव किसान रजिस्ट्री में अद्यतन हो जाए।

तीसरी परत में प्रत्येक भूखंड पर बोई गई फसल का विवरण शामिल होता है। यह विवरण बुवाई पूरी होने के बाद प्रत्येक फसल के मौसम में किए गए डिजिटल/तकनीक आधारित फसल सर्वेक्षण के जरिए हासिल किया जाता है। केन्द्र सरकार ने विभिन्न समझौता ज्ञापनों के जरिए 35 राज्यों और केन्द्र- शासित प्रदेशों के साथ साझेदारी की है। इस डिजिटल मिशन को केन्द्र और राज्य के बीच मजबूत सहयोग के जरिए कार्यान्वित किया जा रहा है। इसमें पूर्ण समावेशन सुनिश्चित करते हुए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

एग्री स्टैक एक संघीय डेटाबेस है जिसका स्वामित्व राज्यों/केन्द्र-शासित प्रदेशों के पास है, लेकिन केन्द्र सरकार सेवाओं की आपूर्ति और डेटा विश्लेषण के लिए इसका उपयोग कर सकती है। इसका उद्देश्य प्रत्येक किसान के लिए एक सत्यापित डिजिटल पहचान बनाना, उस पहचान को सटीक रूप से मैप किए गए भूखंड से जोड़ना और प्रत्येक मौसम में उगाई जाने वाली फसलों को दर्ज करना है। यह स्टैक नियमों पर आधारित एवं स्वचालित सेवा वितरण को विभिन्न योजनाओं और भौगोलिक क्षेत्रों में संभव बनाता है। इससे किसानों को बार-बार अपनी पहचान, भूमि स्वामित्व या फसल के विवरण को साबित करने की जरूरत नहीं होती है।

इसमें गोपनीयता और डेटा संरक्षण संबंधी कानूनों के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करते हुए किसानों से संबंधित जानकारी तक पहुंच एक मजबूत सहमति तंत्र के जरिए होती है। कागजी रिकॉर्ड से डिजिटल आधार तक दशकों तक, कृषि संबंधी प्रशासन कागजी अभिलेखों और मैनुअल सर्वेक्षण पर बहुत अधिक निर्भर रहा। यह अक्सर नागरिकों के लिए उत्पीड़न और भ्रष्टाचार का कारण बनता था।

एग्री स्टैक इस पुरानी परंपरा से हटकर एक क्रांतिकारी बदलाव लाता है। किसानों की पहचान का डिजिटलीकरण करके और उन्हें भूमि एवं फसल के आंकड़ों से जोड़कर, यह भारतीय कृषि की एक विश्वसनीय और नई तस्वीर पेश करता है। अब तक 9 करोड़ से अधिक किसान आईडी का सृजन इस सफर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ये डिजिटल आईडी एक विश्वसनीय स्रोत के रूप में कार्य करते हैं। इससे किसानों को बार-बार सत्यापन के बिना कई सेवाओं का लाभ उठाने में मदद मिलती है और लेन-देन की लागत कम हो जाती है।

सरकारी एजेंसियों की दृष्टि से, ये आईडी लाभार्थियों की पहचान में होने वाली त्रुटियों को कम करते हैं और लाभ का सही लाभार्थियों तक पहुंचना सुनिश्चित करने में सहायक साबित होते हैं। हालांकि, यहां यह स्पष्ट किया जाता है कि एग्री स्टैक की शुरुआत मुख्य रूप से किसानों को विभिन्न योजनाओं के लाभ उठाने के लिए सशक्त बनाने के इरादे से की गई है, लेकिन यह भूमि के रिकॉर्ड या भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र की जगह नहीं लेगा। भले ही अधिकार अभिलेख (रिकॉर्ड ऑफ राइट्स) के साथ इसका जुड़ाव प्रामाणिकता सुनिश्चित करता हो। डिजिटल फसल सर्वेक्षण: फसल की वास्तविक जानकारी वर्ष 2025-26 में, 24 राज्यों ने 600 से अधिक ज़िलों में लगभग 30 करोड़ भूखंडों पर मोबाइल उपकरणों, जियोटैगिंग और सैटेलाइट की मदद से डिजिटल फसल सर्वेक्षण किया। यह सर्वेक्षण पारंपरिक विधियों से हटकर एक महत्वपूर्ण बदलाव है। पारंपरिक विधियां अक्सर धीमी होती थीं और उनमें विसंगतियों या त्रुटियों की गुंजाइश अधिक रहती थी। यह डेटा उपज का अनुमान लगाने, खरीद की योजना बनाने और बाजार से संबंधित पूर्वानुमान लगाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाता है। यह सूखे, बाढ़ या कीटों के कारण फसल पर पड़ने वाले दबाव की शीघ्र पहचान करके आपदा की तैयारी को भी ठोस बनाता है।

किसानों के लिए, बेहतर डेटा समय पर एवं फसल-विशेष से जुड़ी सलाह और गड़बड़ होने पर त्वरित सहायता प्रदान करता है। देश भर में भूमि से जुड़े प्रशासन में मौजूद विविधता को ध्यान में रखते हुए, इस संरचना में स्थानीय जरूरतों के अनुरूप इसे अनुकूलित करने का अंतर्निहित लचीलापन है। साथ ही, अंतरसंचालनीयता सुनिश्चित करने हेतु सामान्य मानकों को बनाए रखा गया है ताकि राज्यों और केंद्रीय प्रणालियों के बीच डेटा का निर्बाध आदान-प्रदान संभव हो सके। उदाहरण के तौर पर, कुछ ऐसे राज्य हैं जहां दशकों से भूमि के रिकॉर्डों को अद्यतन नहीं किया गया है और पूर्वजों के नाम अभी भी दर्ज हैं। भूमि के रिकॉर्डों को अद्यतन करने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन इस बीच, मृतक मालिकों के नाम पर दर्ज भूमि पर खेती करने वाले उत्तराधिकारी किसानों को राजस्व विभाग द्वारा सत्यापन के बाद किसान आईडी जारी किया जा सकता है ताकि लाभों की निरंतरता सुनिश्चित हो सके। जहां भी राज्य के कानून अनुमति देते हैं और राज्य सहमत होते हैं, वहां मजबूत स्वामी-प्राधिकरण तंत्र के साथ, बटाईदारों और किरायेदार किसानों को भी विशिष्ट योजना के लाभों को हासिल करने के लिए शामिल किया जा सकता है। उत्तर-पूर्वी राज्यों में, जहां सामुदायिक स्वामित्व का वर्चस्व है, भू-निर्देशांक-आधारित प्रमाणीकरण प्रथागत रीति-रिवाजों को बाधित किए बिना समावेशन की अनुमति देता है। इससे किसानों को कैसे लाभ होगा? किसानों के लिए, डिजिटल व्यवस्था का मतलब है कम फॉर्म भरना, स्थानीय कार्यालयों में कम चक्कर लगाना और सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं तक पहुंचने में अधिक पारदर्शिता।

भूमि के स्वामित्व और फसलों के इतिहास के अद्यतन विवरणों वाले विश्वसनीय डिजिटल रिकॉर्ड बैंकों और बीमाकर्ताओं को जोखिम का आकलन करने और किसानों की जरूरतों के अनुरूप उत्पाद तैयार करने में समर्थ बनाते हैं। एग्री स्टैक में किसान संगठनों को मजबूत करने की क्षमता है। सत्यापित डेटा किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को उपज एकत्रित करने, बेहतर कीमतों के लिए बातचीत करने और कार्यशील पूंजी तक अधिक आसानी से पहुंच हासिल करने में मदद कर सकता है।

भूमि से जुड़े डेटा को फसलों की बुवाई और मिट्टी की सेहत से संबंधित विवरणों से लैस करने से कृषि के विस्तार में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता है, क्योंकि अब किसानों की जरूरतों के अनुरूप सलाह तैयार और प्रसारित की जा सकती है। वह भी बहुत कम लागत पर। किसान स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर बुवाई के सर्वोत्तम समय, सिंचाई कार्यक्रम, पोषक तत्वों के प्रयोग और कीट प्रबंधन के बारे में व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। प्रशासन और नीतिगत प्रक्रिया पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? एग्री स्टैक शासन की प्रक्रियाओं में सुधार लाने और साक्ष्य-आधारि व डेटा-संचालित नीति निर्माण को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करता है।

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इस प्रावधान के कारण नीति निर्माताओं के पास फसल पैटर्न पर नजर रखने, आपूर्ति और मांग के बीच के अंतर का अनुमान लगाने और मूल्य अस्थिरता को रोकने के लिए समय पर हस्तक्षेप करने हेतु सटीक और समय पर डेटा उपलब्ध होता है। एक बार किसान की पहचान, भूमि के स्वामित्व और बोई गई फसल का डिजिटल सत्यापन हो जाने के बाद, नकद या वस्तु के रूप में सब्सिडी वितरण, फसल बीमा, खरीद या ऋण आदि से संबंधित लेनदेन डिजिटल रूप से सुचारू रूप से किए जा सकते हैं। आधार-आधारित भुगतान गेटवे लाभ को सही लाभार्थी तक पहुंचना सुनिश्चित करते हैं। यह संशोधित प्रणाली सार्वजनिक व्यय का स्पष्ट डिजिटल रिकॉर्ड बनाकर पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाती है।

यह देखा गया है कि केन्द्र और राज्य स्तर पर विभिन्न मंत्रालयों और कुछ मामलों में तो एक ही मंत्रालय के विभिन्न विभागों ने भी योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए अपने-अपने किसान डेटाबेस विकसित किए हैं। एग्री स्टैक एक साझा लेकिन सार्वभौमिक डिजिटल माध्यम विकसित करके इस तरह के स्व-निर्मित डेटाबेस की सीमाओं को तोड़ता है ताकि कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारी समितियां, राजस्व, खाद्य, उर्वरक, ऋण और बीमा प्रणालियां एक ही सत्यापित डेटा का उपयोग करके कार्य कर सकें।

इससे न केवल परिचालन संबंधी दक्षता बेहतर होती है, बल्कि किसानों पर विभिन्न योजनाओं के लाभ प्राप्त करने के लिए कई पोर्टलों पर पंजीकरण करने का बोझ भी कम होता है। कई राज्यों ने एग्री स्टैक के उपयोग को सफलतापूर्वक लागू किया है। छत्तीसगढ़ ने पिछले खरीफ सीजन के दौरान एमएसपी आधारित धान की खरीद के लिए किसानों का पंजीकरण सुचारू रूप से करने हेतु एग्री स्टैक का उपयोग किया।

मध्य प्रदेश ने पीएमएएसएचए के तहत सोयाबीन किसानों को मूल्य घाटे के आधार पर सहायता प्रदान करने हेतु इस डेटाबेस का उपयोग किया। महाराष्ट्र आपदा राहत सहित अपने सभी डीबीटी आधारित लाभों के लिए एग्री स्टैक का उपयोग कर रहा है। नवाचार को प्रोत्साहित करना एग्रीस्टैक की खुली और मानकीकृत संरचना नवाचार के लिए एक इकोसिस्टम प्रदान करता है। खासकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग के लिए। जैसे-जैसे यह स्टैक परिपक्व होता जाता है, स्टार्टअप के लिए फसलों से जुड़े डेटा, मौसम संबंधी पूर्वानुमान और बाजार की कीमतों को उपयोगकर्ता के अनुकूल टूल में संयोजित करने वाले एप्लिकेशन बनाने के अवसर खुलते जाते हैं।

वित्त मंत्री ने अपने हालिया सार्वजनिक भाषणों में एग्री स्टैक को “भारत की अगली बड़ी उपलब्धि” और “यूपीआई जैसी अगली क्रांति” के रूप में पेश किया है। भारत आत्मनिर्भरता और दुनिया का खाद्य भंडार बनने की दिशा में अग्रसर है। ऐसे में एग्री स्टैक एक दूरदर्शी सुधार है। इस सुधार के तहत डेटा किसानों को सशक्त बनाता है, तकनीक शासन को मजबूत करती है और सहयोग प्रगति को गति देता है।

Dr. Devesh Chaturvedi

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