देहरादून: प्रधानमंत्री द्वारा देशवासियों से एक साल तक सोना (Gold) न खरीदने की अपील का असर अब सर्राफा कारोबार पर साफ दिखने लगा है। इस अपील के विरोध में और अपने व्यवसाय को बचाने के लिए सर्राफा व्यापारी अब सड़कों पर उतर आए हैं। बीती देर शाम सर्राफा मंडल देहरादून के बैनर तले व्यापारियों ने राजधानी के प्रसिद्ध धामावाला बाजार में मोमबत्ती जलाकर एक सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया और सरकार के इस कदम पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की।
व्यापारियों की रोजी-रोटी और कर्मचारियों के वेतन पर संकट
सांकेतिक विरोध प्रदर्शन के दौरान सर्राफा मंडल देहरादून के अध्यक्ष सुनील मैंसोन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की इस अपील का बाजार पर बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने व्यापारियों और उनसे जुड़े परिवारों के सामने खड़े हुए संकट को लेकर निम्नलिखित मुख्य बातें कहीं:
रोजी-रोटी पर संकट: यदि देश की जनता प्रधानमंत्री के बयान के आधार पर साल भर तक सोना नहीं खरीदेगी, तो सर्राफा व्यापारियों की रोजी-रोटी पूरी तरह ठप हो जाएगी।
कर्मचारियों के वेतन की समस्या: दुकानों और प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों को तनख्वाह देना मुश्किल हो जाएगा, जिससे बड़े पैमाने पर बेरोजगारी की स्थिति बन सकती है।
हितधारकों से संवाद की कमी: प्रधानमंत्री को इतना बड़ा बयान सार्वजनिक करने से पहले इस क्षेत्र के हितधारकों (Stakeholders) के साथ बैठक करनी चाहिए थी।
बीच के रास्ते की मांग: सरकार को व्यापारियों से बात करनी चाहिए थी ताकि कोई ऐसा बीच का हल निकाला जाता जिससे केंद्र सरकार का उद्देश्य भी पूरा होता और व्यापारियों को भी नुकसान नहीं झेलना पड़ता।
सरकार से बीच का रास्ता निकालने की मांग
सर्राफा मंडल के पदाधिकारियों का कहना है कि वे देश हित के फैसलों में हमेशा सरकार के साथ खड़े हैं, लेकिन बिना किसी पूर्व योजना और बातचीत के की गई ऐसी अपीलों से पूरा उद्योग तबाह हो सकता है। प्रदर्शनकारी व्यापारियों ने मांग की है कि सरकार जल्द ही इस विषय पर सर्राफा एसोसिएशनों के साथ संवाद स्थापित करे, ताकि इस मंदी और असमंजस की स्थिति से कारोबारियों को बाहर निकाला जा सके।
Reported By: Shiv Narayan













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