
भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में आपदा से निपटने और जनहानि को कम करने के लिए राज्य सरकार ने लोगों को भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली से जुड़ने की अपील की है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने प्रदेशवासियों से आईआईटी रुड़की के सहयोग से तैयार किए गए ‘भूदेव’ ऐप और ‘सचेत’ ऐप को मोबाइल फोन में डाउनलोड करने का आग्रह किया है, ताकि भूकंप की स्थिति में समय रहते अलर्ट मिल सके और लोग सतर्क होकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की तैयारी कर सकें।
मुख्य सचिव ने बताया कि हाल ही में आए भूकंप के दौरान ऐप के माध्यम से लोगों को समय पर अलर्ट प्राप्त हुआ था। उन्होंने कहा कि भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा के दौरान शुरुआती चेतावनी लोगों को सुरक्षित कदम उठाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण समय उपलब्ध करा सकती है।
हर महीने होगी अर्ली वार्निंग सिस्टम की टेस्टिंग
आनंद बर्द्धन ने बताया कि प्रदेशभर में स्थापित अर्ली वार्निंग सायरन और सेंसर की कार्यप्रणाली को परखने के लिए नियमित परीक्षण किया जाएगा। इसके तहत हर महीने निर्धारित तारीख और समय पर टेस्टिंग की जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि आपात स्थिति में चेतावनी प्रणाली सही ढंग से काम कर रही है।
टेस्टिंग का उद्देश्य तकनीकी व्यवस्था की स्थिति का आकलन करना और किसी भी कमी को समय रहते दूर करना है। इससे भूकंप के दौरान चेतावनी तंत्र की उपयोगिता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
जनजागरूकता और सतर्कता पर जोर
मुख्य सचिव ने लोगों से अपील की कि वे आपदा प्रबंधन से जुड़ी तकनीकों का उपयोग करें और भूकंप के समय बरती जाने वाली सावधानियों के प्रति जागरूक रहें। उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए पूर्व चेतावनी प्रणाली और जनभागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, भूकंप की पूर्व चेतावनी प्रणाली भूकंप आने से पहले सीमित समय का अलर्ट दे सकती है, लेकिन यह भूकंप की सटीक भविष्यवाणी नहीं करती। ऐसे में लोगों को अलर्ट मिलने पर तुरंत सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।
आनंद बर्द्धन, मुख्य सचिव, उत्तराखंड।
Reported By: Rajesh Kumar













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