उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के तहत जारी की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची में 8,26,977 मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। मैदानी जिलों के साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटे हैं। इसे लेकर पलायन को भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
इस मुद्दे पर भाजपा विधायक विनोद चमोली ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मतदाता सूची में हुई यह कटौती वर्ष 2003 की मैपिंग के आधार पर की गई है, इसलिए कई मतदाताओं का विवरण फिलहाल सामने नहीं आ पा रहा है।
उन्होंने बताया कि नाम हटाए जाने के दो प्रमुख कारण हैं। पहला, कई लोगों के नाम दो या तीन अलग-अलग स्थानों की मतदाता सूची में दर्ज थे। ऐसे मामलों में जहां किसी व्यक्ति का नाम दूसरे राज्य, जैसे उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में दर्ज पाया गया, वहां से उत्तराखंड की सूची से उसका नाम हटा दिया गया। दूसरा कारण मृत मतदाताओं के नामों को सूची से हटाना है।
विनोद चमोली ने कहा कि राज्य गठन के बाद उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से लगातार पलायन हुआ, जबकि मैदानी क्षेत्रों में आबादी और विकास तेजी से बढ़ा। इसी कारण मतदाता संख्या के वितरण में भी बदलाव देखने को मिला है।
उन्होंने यह भी कहा कि अब नए मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ऐसे में संभावना है कि आगामी अंतिम मतदाता सूची में विशेष रूप से मैदानी क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या फिर बढ़ेगी।
गौरतलब है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची पर अब दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया जारी है। निर्वाचन आयोग के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पात्र नागरिक अपने नाम जुड़वाने, संशोधन कराने या अन्य आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं, जिसके बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
विनोद चमोली, विधायक, भाजपा
Reported By: Praveen Bhardwaj












Discussion about this post