उद्योगों में गुणवत्ता और जवाबदेही की संस्कृति को मजबूत करने के उद्देश्य से भारतीय मानक ब्यूरो (BIS), देहरादून और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (IIA) के रुड़की चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में “मानक मंथन” उद्योग संवेदीकरण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 100 से अधिक उद्यमियों ने भाग लेकर गुणवत्ता मानकों पर गहन चर्चा की।
कार्यक्रम का उद्घाटन BIS देहरादून के निदेशक हेमंत बी. आडे, सहायक निदेशक सौरभ चौरसिया तथा IIA पदाधिकारियों—प्रवीण गर्ग, अजय जैन, प्रेम सिंह, सुंदरम चौधरी और दीपमणि मिश्रा द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
अपने संबोधन में हेमंत बी. आडे ने कहा कि उद्योगों के साथ सतत संवाद गुणवत्ता सुधार की कुंजी है और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए भारतीय मानकों का पालन बेहद आवश्यक है। वहीं सौरभ चौरसिया ने तकनीकी सत्र के दौरान BIS प्रमाणन प्रक्रिया, आईएस मानकों और गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कई उत्पादों के लिए BIS प्रमाणन अनिवार्य किया जा चुका है और बिना लाइसेंस उत्पादन या बिक्री दंडनीय है।
कार्यक्रम में BIS प्रमाणन के लाभों पर भी प्रकाश डाला गया, जिसमें उत्पाद की विश्वसनीयता, ब्रांड वैल्यू में वृद्धि, बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त और सरकारी निविदाओं में प्राथमिकता शामिल हैं।
प्रश्नोत्तर सत्र में उद्यमियों ने लाइसेंस प्रक्रिया, टेस्टिंग लैब और दस्तावेजों से संबंधित सवाल पूछे, जिनका अधिकारियों ने विस्तार से समाधान किया। IIA पदाधिकारियों ने कहा कि रुड़की के MSME उद्योगों को मानकों के अनुरूप बनाना प्राथमिकता है, ताकि स्थानीय उत्पाद वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।
Reported By: Arun Sharma













Discussion about this post