उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के अवसर पर स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय एवं हिमालयन आयुर्वेदिक एंड मेडिकल कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में महा-वृक्षारोपण एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, पर्यावरणविदों, विश्वविद्यालय परिवार और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण तथा ‘हरित एवं स्वस्थ उत्तराखंड’ के संकल्प को दोहराया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। विश्वविद्यालय की उपाध्यक्ष एवं लेखक गांव की निदेशक विदुषी ‘निशंक’ ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी सांस्कृतिक आस्था और जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रकृति से जुड़ी यह लोक परंपरा हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देती है।
मुख्य अतिथि एवं प्रख्यात पर्यावरणविद् सच्चिदानंद भारती ने कहा कि “जहां जंगल नहीं होते, वहां पहाड़ की बेटी भी नहीं दी जाती।” उन्होंने कहा कि प्रकृति संरक्षण उत्तराखंड की संस्कृति और अस्तित्व से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि लेखक गांव में शुरू की जा रही ‘प्रकृति की पाठशाला’ विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने की एक अभिनव पहल है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपराएं सदैव प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का संदेश देती रही हैं। उन्होंने कहा कि हरेला केवल पौधारोपण का पर्व नहीं, बल्कि लगाए गए पौधों के संरक्षण का भी संकल्प है। उनके अनुसार, जब तक व्यक्ति प्रकृति से नहीं जुड़ता, तब तक उसका जीवन अधूरा है और ‘प्रकृति की पाठशाला’ समाज को प्रकृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
स्पर्श गंगा की राष्ट्रीय संयोजिका एवं विश्वविद्यालय की कोषाध्यक्ष डॉ. आरुषि निशंक ने युवाओं से पर्यावरण संरक्षण अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए आवश्यक जनआंदोलन है।
इस अवसर पर जीवनवाला ग्राम पंचायत के प्रधान गुरजीत सिंह लाड़ी ने विश्वविद्यालय द्वारा प्रत्येक रविवार चलाए जा रहे स्वच्छता अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इससे स्थानीय समाज भी प्रेरित हो रहा है और ग्राम पंचायत ऐसे प्रयासों में निरंतर सहयोग करती रहेगी।
कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली और प्रकृति संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का संकल्प लिया। औपचारिक सत्र के बाद परिसर और निर्धारित क्षेत्रों में विभिन्न प्रजातियों के पौधों का सामूहिक वृक्षारोपण किया गया, जिसके माध्यम से हरित एवं स्वस्थ उत्तराखंड के निर्माण का संदेश दिया गया।
Reported By: Arun Sharma












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